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खोरी फरीदाबाद तोड़फोड़, विद्रोही ने चलाये भाजपा, संघ पर तीखे तीर

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15 सितम्बर 2020- स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष एवं हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता वेदप्रकाश विद्रोही ने फरीदाबाद नगर निगम द्वारा खोरी गांव की लगभग 90 एकड़ पहाडी भूमि पर गरीबों के वर्षो से बनाये गए लगभग 1200 घरों को इस कोरोना संक्रमण संकट व वर्षा के समय तोड़कर गरीबों को बेघर करने के हरियाणा भाजपा-जजपा सरकार के निर्णय को घोर अमानवीय व क्रूरतापूर्ण कदम बताया। विद्रोही ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की परिपालना के नाम पर इस कोरोना संकट व वर्षा के समय गरीबों को बेघर करना किसी भी तरह मानवीय दृष्टिकोण से उचित नही है। उक्त कथित अवैध निर्माण न तो एक दिन में रातो-रात बने और न ही जबरदस्ती बने। 
 विद्रोही ने कहा कि जब 1981 में मैंने दिंवगत सवामी अग्निवेश के साथ मिलकर पत्थर खदानों के बंधुआ मजदूरों को आजाद करवाने व पत्थर खदान मजदूरों का राष्ट्रीय खदान मजदूर यूनियन से संगठन बनाने का अभियान प्रारंभ किया था, तभी से खोरी गांव की इस पहाडी भूमि पर गरीबों के आशियाने बनने शुरू हुए थे। उस समय मैं स्वयं इस पहाडी भूमि पर बने पत्थर खदान मजदूरों के झौपड़ों में लगभग छह साल तक लगातार दूसरे-तीसरे दिन उनकी समस्याओं को सुनने व श्रम कानून की जानकारी मजदूरों को देने के लिए जाते थे। इन पत्थर मजदूरों को उस समय खोरी सहित आसपास के गांवों के पत्थर खदान ठेकेदारों ने झोपडों में बसाया था। 

विद्रोही ने कहा कि उस समय गुर्जर बाहुल इस क्षेत्र के इन गांवों के सभी प्रमुख व्यक्ति, राजनीतिक व सामाजिक नेता, सरपंच, पंच, नम्बरदार पत्थर खाद्यान धंधे से जुड़े हुए थे और गांव के इन चौधरियों ने गरीबों को बसाया था और झुग्गियों के अवैध प्लाट उनके नाम किये थे। सवाल उठता है कि जब 1980 के दौर में इस पहाडी भूमि पर गरीबों के कथित अवैध मकान खुलेआम बनाये जा रहे थे, उसमें बिजली कनैक्शन दिये जा रहे थे, तब फरीदाबाद नगर निगम, जिला प्रशासन व हरियाणा सरकार कहां सोई हुई थी? जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश से इन क्षेत्रों में स्थित स्टोन क्रेशर व पत्थर खदान मनाईनिंग बंद कर दिया गया, तब इस पहाडी भूमि पर प्रभावशाली लोगों ने कब्जा करने का अभियान चलाया और जो पहाड़ी भूमि कभी गांव के लोग अपनी बताकर गरीबों को अवैध मकान बनवाकर बसवा रहे थे, वह भूमि नगर निगम व वन विभाग की बताई जाने लगी।

 विद्रोही ने सवाल किया कि गरीबों को धोखा देकर उक्त जमीन बेची गई, इसमें उनका क्या कसूर है? तब नगर निगम, वन विभाग व सरकार का प्रशासन कहां सोया था और अब कोरोना संकट के समय गरीबों को उजाडना कहां तक उचित है? जो भाजपाई-संघी केन्द्र की मोदी-भाजपा सरकार विभिनन संघी सरकारों के मुख्यमंत्री मुम्बई में एक उच्च वर्ग की संघी अदाकारा के दफ्तर का अवैध छज्जा तोडे जाने पर आज राजनीतिक लाभ के लिए हायतौबा कर रहे है, वहीं संघी फरीदाबाद के खोरी गांव में कथित 1200 अवैध मकानों पर कोरोना संकट के समय हथौडा चलाकर खुश हो रहे है। सवाल उठता है कि मोदी-भाजपा-संघ के लिए एक अदाकारा का अवैध छज्जा टूटना राष्ट्रीय समस्या और गरीबों को उजाडना आम बात? यह सोच ही भाजपा-संघ के असली चाल-चरित्र व उनकी प्राथमिकता को दर्शाता है। मुम्बई की तुलना पीओके से करने वाली अदाकारा का छज्जा टूटने पर मोदी सरकार उसे वाई प्लस सुरक्षा देती है और पिछडे, दलित व वंचित वर्ग के गरीबों के मकानों को बेरहमी से तोड़कर उन्हे कोरोना संकट में मरने के लिए खुले आसमान में छोड़ देती है। 
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