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मेसर्ज एम्पायर रियलटेक प्राइवेट लिमिटेड पर हरेरा की गाज गिरी 

Gurugram-Haryana-News
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चण्डीगढ़, 23 अक्तूबर- हरियाणा रियल एस्टेट रेग्यूलेटरी अथॉरिटी (हरेरा), गुरुग्राम के एक अनोखे और पथ-प्रदर्शक फैसले के तहत पहली बार, संबंधित कंपनी मेसर्ज सीएचडी डेवलपर्स के साथ बिल्डर को ब्लैक लिस्ट करने और चालू परियोजनाओं के पूरा होने तक आगे नई परियोजनाओं के पंजीकरण से रोकने के लिए मेसर्ज एंपायर रियलटेक प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस भेजा गया है।

हरेरा, गुरुग्राम के अध्यक्ष डॉ. के.के. खंडेलवाल ने आज यह जानकारी देते हुए बताया कि परियोजना के पंजीकरण को रद्द करने या परियोजना को पूरा करने और आवंटियों को कब्जा सौंपने के लिए भी नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि परियोजना की धनराशि को और कहीं लगाए जाने की भी संभावना है और हो सकता है कि यह निर्माण की बजाय अन्यथा इस्तेमाल की गई हो।

 मामले की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि मेसर्ज एम्पायर रियलटेक प्राइवेट लिमिटेड ने वर्ष 2011 में ‘106 गोल्फ एवेन्यू, सेक्टर-106, गुरुग्राम’ के नाम से एक परियोजना शुरू की थी और अपार्टमेंट का कब्जा दिसंबर 2016 तक दिया जाना था। लेकिन 4 साल की देरी होने के बावजूद खरीददार अपने अपार्टमेंट के लिए इधर-उधर चक्कर काट रहे हैं। प्रमोटर ने प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए रेरा को 30 जून, 2021 की संशोधित तिथि की सूचना दी। लेकिन, धनराशि और निर्माण की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए, प्रोजेक्ट में और विलंब की संभावना है। हरेरा, गुरुग्राम के अध्यक्ष डॉ. के.के. खंडेलवाल, प्राधिकरण के सदस्य श्री एस.सी. कुश और श्री समीर कुमार की पीठ ने इस आशय का नोटिस जारी करने का निर्णय लिया कि प्रमोटर द्वारा परियोजना में अपेक्षित प्रगति क्यों नहीं की जा रही है।

डॉ.खंडेलवाल ने कहा कि प्रमोटर द्वारा त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है। परियोजना में 642 इकाइयाँ हैं जिनमें से 600 इकाइयाँ बेची जा चुकी हैं। वर्ष 2016 तक आवंटियों से लगभग 500 करोड़ रुपये एकत्र किए गए। उन्होंने बताया कि प्रमोटर ने लगभग 150 करोड़ रुपये का ऋण भी लिया है, जिसमें से 36 करोड़ रुपये अभी भी बकाया हैं। उन्होंने कहा कि आवंटियों के साथ-साथ ऋणदाताओं से भी धन उपलब्ध होने के बावजूद परियोजना पूरी होने से बहुत दूर है।

उन्होंने कहा कि परियोजना में 9 टावर हैं और केवल 3 टावरों में 80 प्रतिशत काम पूरा हुआ है, जबकि शेष टावरों में 80 प्रतिशत से भी कम काम हुआ है। उन्होंने कहा कि निर्माण का काम अक्टूबर 2018 से अटका हुआ है। आवंटियों को बेहद परेशान होना पड़ रहा है क्योंकि अपार्टमेंट की लागत का 90 प्रतिशत भुगतान करने के बाद भी, निकट भविष्य में यूनिट का कब्जा लिए जाने की कोई संभावना नहीं है। ऐसा लगता है कि प्रवर्तक द्वारा धनराशि को कहीं और लगाया गया है क्योंकि आवंटियों और ऋण देने वाली संस्थाओं से 600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त करने के बाद भी निर्माण पर केवल 168 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

  डॉ. खंडेलवाल ने आगे बताया कि प्राधिकरण ने परियोजना खाते के फॉरेंसिक ऑडिट का आदेश देने का फैसला किया है ताकि यदि धनराशि का कहीं कोई गलत इस्तेमाल किया गया हो या इसका दुरुपयोग किया गया हो तो निर्माण कार्य पूरा करवाने के लिए इसे वापस परियोजना में लगवाया जा सके। प्रमोटर के साथ आवंटियों की एसोसिएशन की बैठक बुलाई गई थी और परियोजना को पूरा करने के लिए मिटीगेशन प्लान पर व्यापक चर्चा की गई थी।

उन्होंने कहा कि प्रमोटर ने परियोजना का एक अलग से रेरा खाता नहीं खोला है। आवंटियों की किस्तें बैंक के एस्क्रो खाते में प्राप्त हुई थी और वहाँ जमा किए गए सभी पैसे ऋणदाता द्वारा निकाल लिए गए और निर्माण के लिए कुछ भी नहीं बचा, जबकि 70 प्रतिशत राशि केवल निर्माण के लिए उपयोग किए जाने वाले अलग रेरा खाते में जमा की जानी चाहिए थी। यह रियल एस्टेट (विनियमन और विकास)अधिनियम, 2016 की धारा 4 का स्पष्ट उल्लंघन है और प्रमोटर के खिलाफ अधिनियम की धारा 60 के तहत दंडात्मक कार्यवाही की जानी बनती है।

 उन्होंने कहा कि प्रमोटर को नोटिस जारी किया गया है कि क्यों न दंडात्मक कार्यवाही शुरू की जाए और क्यों न परियोजना लागत के 5 प्रतिशत तक, जोकि 28.38 करोड़ बनती है, पैनल्टी लगाई जाए। प्रमोटर को आवंटियों की एसोसिएशन के परामर्श से एक महीने के भीतर परियोजना को पूरा करने के लिए मिटीगेशन प्लान प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। प्राधिकरण ने आवंटियों की एसोसिएशन को परियोजना को पूरा करवाने का विकल्प भी दिया है।


          डॉ.खंडेलवाल ने कहा कि प्रमोटर ने तिमाही आधार पर अपेक्षित प्रगति हासिल न करके पंजीकरण की शर्तों का घोर उल्लंघन किया है। एसोसिएशन ने परियोजना को अपने हाथ में लेने और इसे पूरा करने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण एसोसिएशन के प्रस्ताव की जांच कर रहा है। प्रमोटर को इस परियोजना को पूरा करने के लिए धनराशि देने के लिए कहा गया है, जो 104 करोड़ रुपये अनुमानित है। आवंटियों ने प्रमोटर में अपना विश्वास खो दिया है तथा प्रमोटर को और अधिक राशि का भुगतान करने को तैयार नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि इसी प्रमोटर के पास असामान्य रूप से देरी की अन्य अधूरी परियोजनाएं हैं जैसे सीएचडी वैन ग्रुप हाउसिंग जो 10 एकड़ भूमि पर फैली हुई है और सीएचडी रोजर्टिको (वाणिज्यिक, 10 एकड़), जिनमें प्राधिकरण द्वारा जांच के आदेश भी दिए जा रहे हैं। प्राधिकरण ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है कि क्यों न प्रमोटर को ब्लैकलिस्टेड कर दिया जाए और इन परियोजनाओं के पूरा होने तक किसी भी परियोजना के विकास से रोक दिया जाए। उन्होंने कहा कि परियोजना 106 गोल्फ एवेन्यू, सेक्टर 106, गुरुग्राम के 600 आवंटियों की रातों की नींद हराम हो गई है और नियत तारीख के 5 साल गुजरने के बाद भी अपने अपार्टमेंट के कब्जे में बेवजह देरी के कारण असहनीय दर्द और पीड़ा से गुजर रहे हैं तथा इस संबंध में अनिश्चितता बनी हुई है कि यह परियोजना कब पूरी होगी और पूरी होगी भी या नहीं।

 उन्होंने कहा कि आवंटियों ने अपनी कड़ी मेहनत से कमाई गई जीवन-भर की बचत इस परियोजना में लगाई है। बिल्डर के पास बार-बार चक्कर लगाने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हुई। अब बिल्डर को आगे आने और प्राधिकरण की मौजूदगी में आवंटी एसोसिएशन के साथ परियोजना से जुड़ मामले पर चर्चा करने के लिए कहा गया है ताकि परियोजना के वर्तमान चरण के साथ-साथ इसे पूरा करवाने के लिए मिटीगेशन प्लान पर भी चर्चा की जा सके। प्रमोटर को एक सप्ताह के भीतर निर्माण शुरू करने को कहा गया है अन्यथा दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रमोटर ने इस सप्ताह के भीतर काम शुरू करने का आश्वासन दिया है।

डॉ. खंडेलवाल ने कहा कि प्रमोटर के बारे में यह कहा जाता है कि उसने आवंटियों से तो बाहरी विकास शुल्क वसूल कर लिया परन्तु उच्च न्यायालय के कुछ आदेशों की आड़ में इसे नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के पास जमा नहीं करवाया। जो पैसा आवंटियों से एकत्र किया गया है और सरकार का है, उसे प्रमोटर द्वारा वापस नहीं लिया जा सकता और धनराशि के दुरुपयोग की पूरी संभावना है।

उन्होंने कहा कि दिलचस्प बात यह है कि प्रमोटर ने आवंटियों से प्रति यूनिट 84 लाख से 1.5 करोड़ रुपये तक की राशि वसूली है जिनमें विधवाएं, वरिष्ठ नागरिक, सेना और सिविल, दोनों से सेवानिवृत्त कर्मचारी शामिल हैं जो न केवल बैंक को ईएमआई का भुगतान कर रहे हैं, बल्कि मकान मालिकों को किराया भी दे रहे हैं। यदि नियत तारीख, जोकि 2016 के आसपास थी, पर उनके संबंधित अपार्टमेंट का कब्जा दे दिया गया होता इन सब बातों से बचा जा सकता था। उन पर ईएमआई और किराए की दोहरी मार पड़ रही है। ऐसे हालात  के चलते, हो सकता है कि कुछ आवंटियों ने अपनी वैकल्पिक व्यवस्था कर ली हो और अब इस परियोजना को जारी न रखने तथा ब्याज सहित अपनी राशि की वापस लेने के इच्छुक हों। उन्होंने कहा कि आवंटी बिल्डर द्वारा उनका पैसा रखने और यूनिट को न सौंपने के चलते उसे हुए गैर-कानूनी लाभ, कब्जा न सौंपने से आवंटियों को हुए नुकसान, मानसिक पीड़ा और तनाव के संबंध में मुआवजे के हकदार हैं।


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