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हम हरियाणा से इस बीमारी को हराएंगें और भारत से भी भगाएंगें- CM, Haryana

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चंडीगढ़, 10 अप्रैल- हरियाणा के मुख्यमंत्री  मनोहर लाल ने राज्य के लोगों का आह्वान करते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी के प्रकोप को समाप्त करने के लिए कोई भी व्यक्ति अपने प्रयास में किसी भी प्रकार की कमी न छोड़ें। जो व्यक्ति इस महामारी से अपने पूरे प्रयास से लडेगा, आने वाले इतिहास में उसका नाम लिखा जाएगा।  मुख्यमंत्री आज यहां लाईव टेलीविजन पर राज्य के लोगों को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने राणा सांगा और बाबर की फौजों के बीच खनवा युद्ध का एक प्रसंग  सांझा करते हुए कहा कि ‘‘आज मैं सभी मेवाती भाईयों से कहना चाहता हूं कि कोरोना की लड़ाई में हम सब मिलकर लडें, जैसे शहीद हसन खां मेवाती ने राणा सांगा के साथ खड़े होकर बाबर की फौजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। मेवात यदि हमारे साथ कोरोना की लड़ाई में मिलकर चलता है तो मैं निश्चित रूप से कहना चाहूंगा कि इसमें किसी भी प्रकार की कोई कठिनाई नहीं हैं कि मेवात से हम इस बीमारी को भगा न सकें। नूंह जिला के लोग इस लड़ाई को लडऩे का दम दिखाएं, इस लड़ाई में पीछे न रहें’’।

नूंह जिला को कोरोना की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण बताते हुए मुख्यमंत्री ने मौलवियों से आग्रह किया कि वे समाज के लोगों को समझाएं कि वे बाहर न निकलें और यदि कोई बाहर से आया या गया हुआ है तो वे अपना टेस्ट करवाएं तथा 14 दिन का क्वारंटीन पीरियड पूरा करें। 

मुख्यमंत्री ने बताया कि हरियाणा में इटली से 14 मरीजों में से 13 मरीजों को ठीक होने पर छुट्टी कर दी गई है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि जब भी कोई व्यक्ति बाहर निकले तो अपने मुंह पर मास्क या कपडें़ का उपयोग करें तथा सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन करें। इसी कड़ी में आशा वर्कर, आंगनवाड़ी वर्कर, स्वयं सहायता समूहों के वर्कर भी सावधानी के साथ अपने कर्तव्यों का पालन कर रही हैं। इसी प्रकार, राज्य में डाक्टर, नर्सिंग स्टाफ, फार्मास्यूटीकल स्टाफ, एंबूलेंस स्टाफ, लैब टेक्निशियन, चतुर्थ श्रेणी कर्मी, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े व्यक्ति व पुलिस के लोग लॉकडाउन की व्यवस्था का मजबूती से पालन करवा रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्थानीय निकायों, पंचायती विभाग, जिला प्रशासन के कर्मचारी व अधिकारी, जन प्रतिनिधि, व्यापार जगत के प्रतिनिधि, औद्योगिक जगत के प्रतिनिधियों सहित सामाजिक संस्थाओं के स्वयं-सेवक भी इस कार्य में लगे हुए है। ऐसे ही हरियाणा के 2.75 लाख कर्मचारी हरियाणा की 2.75 करोड़ जनता के लिए काम करेंगें तो काम आसान हो जाता है।

उन्होंने कहा कि इस संकट से उभरने के लिए काफी संस्थाए व इकाईयां दिन-रात काम कर रही हैं और गांवों में ठीकरी पहरा, राहत शिविर लगाया जा रहा है और गरीब व असहाय लोगों को भोजन उपलब्ध करवाया जा रहा हैं। उन्होंने कहा कि शहरों में भी लोगों को राहत शिविरों में रखा गया है और अब तक सरकार व संस्थाओं द्वारा लगभग 70 लाख भोजन के पैकेट वितरित किए गए हैं और सरकार द्वारा राशन भी लोगों को पहुंचाया जा रहा है। इसके अलावा, गौशालाओं में भी सरकार व गांवों के लोगों द्वारा भूसा व अन्य खाद्य सामग्री पहुंचाई जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा कोरोना रिलीफ फंड में अब तक 72 करोड़ रूपए का योगदान हुआ है और कर्मचारियों ने भी अपना भरपूर योगदान किया है। इसी कड़ी में 160 से अधिक कर्मचारियों ने अपने एक मास का पूरा वेतन दिया है और ऐसे ही ग्रुप-डी के कई कर्मचारियों ने भी अपना पूरे माह का वेतन कोरोना रिलिफ फंड में दिया है। मुख्यमंत्री ने लाईव टेलीविजन के दौरान ऐसे कुछ कर्मचारियों से बातचीत की जिनमें अंबाला के पथरेड़ी गांव के नरेश, जो ग्रुप-डी कर्मचारी है, ने मुख्यमंत्री को बताया कि ‘‘उन्होंने अपने एक माह का वेतन कोरोना रिलिफ फंड में दिया है और इस प्रेरणा के लिए वे अपना मन बना चुके थे और वे चाहते हैं कि वे इस महामारी में तन-मन-धन से लोगों की सहायता करें। नरेश ने बताया कि उनके परिवार में पिता व पत्नी  ने उन्हें प्रेरित किया कि जब नौकरी नहीं थी तब भी गुजारा हो रहा था’’।

इसी प्रकार, स्टाफ नर्स शशि बाला ने मुख्यमंत्री को बताया कि ‘‘उन्होंने भी इस संकट की घड़ी में अपना एक माह का वेतन कोरोना रिलिफ फंड में दिया है क्योंकि वे अस्पताल में काम करती हैं और अस्पताल में गरीबों को देखती है कि कई लोगों के पास कुछ भी नहीं होता और उनकी आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं होती, इसलिए उन्होंने बिना किसी से पूछे यह मन बना लिया था कि वे अपना एक माह का वेतन फंड में देंगी’’।

वहीं, सिपाही रवि ने मुख्यमंत्री से बातचीत करते हुए बताया कि ‘‘उनके द्वारा की गई पढाई, ईमानदारी के गुण, पुलिस ट्रेनिंग की वजह से ही उनके मन में यह था कि इंसानियत के लिए कुछ करना चाहिए। इसलिए उन्होंने भी एक माह का वेतन फंड में जमा कराया है’’।

सरला देवी, जो जेबीटी टीचर हैं, ने मुख्यमंत्री को बताया कि ‘‘मैंने चुपचाप किसी से पूछे बिना अपनी शत-प्रतिशत सैलरी कोरोना रिलिफ फंड में डोनेट कर दी है, उन्होंने मुख्यमंत्री से बातचीत की मार्फत राज्य के लोगों को संदेश दिया कि सभी घरों में अपने आपको सुरक्षित रखें, आप स्वयं सुरक्षित हैं, तो देश सुरक्षित हैं’’।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम हरियाणा से इस बीमारी को हराएंगें और भारत से भी भगाएंगें। उन्होंने कहा कि इस बीमारी से निपटने के लिए कई नई पहल की जा रही है, इसी कडी में करनाल के लोगों ने ‘अडोप्ट-ए-फेमिली’ की एक अवधारणा शुरू की है जिसके तहत आप किसी भी परिवार को अडोप्ट कर सकते हैं। इस अभियान के तहत लगभग 400 लोगों ने अपना योगदान दिया है। उन्होंने लोगों से आग्रह करते हुए कहा कि आप भी किसी न किसी प्रकार से गरीब व असहाय लोगों की मदद कर सकते हैं और मकान मालिक होने के नाते दो माह का किराया ऐसे लोगों से नहीं लेना चाहिए और इस बारे में सरकार ने भी निर्देश जारी किए हैं।
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