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पूरी रात चला ड्रामा, एक कोर्ट से दूसरे कोर्ट दौड़ते रहे दोषियों के वकील, तब भी नहीं बचे निर्भया के दरिंदे 

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नई दिल्ली: निर्भया के दोषियों को आज सुबह साढ़े पांच बजे फांसी पर लटकाया गया लेकिन जानकारी मिल रही है कि उन्हें फांसी से बचाने के लिए उनके वकील रात भर एक कोर्ट से दूसरे कोर्ट तक चक्कर लगा रहे थे। जानकारी के मुताबिक दोषियों के वकील रात  लगभग 10 बजे दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे जिसके बाद निर्भया के परिजन भी हाईकोर्ट पहुँच गए।  सवा दस बजे जस्टिस मनमोहन सिंह और जस्टिस संजय नरूला की बेंच ने वकील एपी सिंह की याचिका पर सुनवाई की। यहाँ सुनवाई के दौरान वकील ऐपी सिंह से बेंच ने कुछ कागजात मांगे तो उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के कारण कोई फोटोकॉपी मशीन काम ही नहीं कर रही है। उन्होंने कई लंबित याचिकाओं की बात कही। मानवाधिकार आयोग याचिका लंबित होने की बात कही। 

रात पौने 11 के करीब जजों ने दोषी के वकील से कहा कि समय ज्यादा हो रहा है। आपके क्लाइंट भगवान् के पास जाने के करीब पहुँच रहे हैं। आपके पास कोई और दलील है तो चार-पांच घंटे आपके पास अभी बचे हैं। इसके बाद वकील एपी सिंह ने दोषियों की गरीबी का हवाला दिया। 

रात्रि साढ़े 11 बजे दोषियों के एक वकील शम्स ख्वाजा ने कुछ  दलीलें दी। रात्रि 12 बजे के आस पास उनकी याचिका खारिज कर दी गई। सवा बारह बजे के करीब दोषियों के वकील एपी सिंह मीडिया पर बरस पड़े और फिर डेढ़ बजे रात्रि को वो किदवई नगर स्थित सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार के घर पहुंचे। कोर्ट से सुनवाई के लिए ढाई बजे रात्रि का समय दिया जिसके बाद ढाई बजे दोषियों के वकील और निर्भया के परिजन सुप्रीम कोर्ट पहुँच गए।  रात्रि  करीब 3:10 बजे सुप्रीम कोर्ट ने दोषी पवन गुप्ता के घटना के वक्त नाबालिग होने के दावे वाली याचिका खारिज कर दी। अगले पांच मिनट के अंदर यानी करीब 3:15 बजे ही राष्ट्रपति की ओर से पवन की दया याचिका खारिज किए जाने को चुनौती देने वाली याचिकी भी खारिज कर दी गई।

करीब 3:35 बजे निर्भया की मां आशा देवी ने कहा, 'मैं सबको धन्यवाद देती हूं। देश की बच्चियों की लड़ाई अंजाम तक पहुंची है। अदालतों में देर करने की टैक्टिक्स अपनाई गई लेकिन हर स्तर पर अदालत ने याचिकाएं खारिज की। मैं महामहिम राष्ट्रपति का भी शुक्रिया करती हूं। वो मेरी बेटी नहीं थी बल्कि पूरे देश की बेटी थी। आज का सूरज देश की बच्चियों के नाम।
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