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हरियाणा प्रांत के सभी जिलों में 15 से 22 नवंबर तक मनाया जाएगा जनजाति गौरव दिवस

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फरीदाबाद-18 नवंबर। जनजाति गौरव बिरसा मुंडा के जन्मदिन को वनवासी कल्याण आश्रम हरियाणा में प्रांत स्तर पर मना रहा है। जनजाति गौरव दिवस 15 नवंबर से 22 नवंबर तक मनाने का निर्णय लिया गया है। जिसके अंतर्गत हरियाणा प्रांत के सभी जिलों में आयोजन किए जा रहे हैं। इस तरह के अयोजन  फरीदाबाद, हिसार, भिवानी और जींद में हो चुके हैं। सप्ताह भर चलने वाले इस विशेष आयोजन का मुख्य उद्देश्य वर्तमान पीढ़ी बिरसा मुंडा के मूलमंत्र प्रतिएक घर आंगन में तुलसी, गाय और शाकाहारी जैसी प्रवृति का संकल्प ले।

बल्लभगढ़ की त्रिखा कॉलोनी स्थित आधारशिला पब्लिक स्कूल में वनवासी कल्याण आश्रम हरियाणा द्वारा आयोजित जनजाति गौरव दिवस कार्यक्रम में बिरसा भगवान विषय पर टोनी चकमा ने उनके जीवन वृंत का परिचय दिया। प्रांत संपर्क प्रमुख श्रीभगवान ने वनवासी कल्याण आश्रम की गतिविधियों संबंधित विस्तार से चर्चा करते हुए जानकारी दी। इस अवसर पर स्कूल के प्रबंधक वकील वैभव शर्मा आचार्य व दीदी उपस्थित रही।

वनवासी कल्याण आश्रम हरियाणा के प्रांत संपर्क प्रमुख श्रीभगवान ने बताया कि वनवासी समाज एवं अन्य जनजातियों की गौरव गाथा के प्रति जनजागरण अभियान के अंतर्गत जनजाति गौरव दिवस 15 नवंबर से शुरू होकर 22 नवंबर तक चलेगा जिसमें हरियाणा के सभी जिलों में आयोजन किए जा रहे है। अभी तक फरीदाबाद, हिसार, भिवानी, जींद, में इस तरह के आयोजन हो चुके हैं। इस आयोजन में स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए प्राण न्यौछावर करने वाले सच्चे देशभक्तों के जीवन वृंत की जानकारी देते हुए वर्तमान पीढ़ी को गौरवशाली व्यक्तित्व से प्रेरणा लेने के उद्देश्य से इसका आयोजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुषांगिक संगठन वनवासी कल्याण आश्रम करता आ रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने भी संगठन की इस मुहिम पर मोहर लगाते हुए 15 नवंबर के दिन को जनजाति गौरव दिवस के रूप में मनाने की घोषणा कर दी है।

1897 से 1900 के बीच बिरसा और उसके साथियों ने तीर कमानों से लैस होकर अंग्रेजी सेना को हराया लेकिन बाद में डोम्बारी पहाड़ पर एक संघर्ष हुआ जिसमें बहुत सी औरतें व बच्चे मारे गये थे। उस जगह बिरसा अपनी जनसभा को सम्बोधित कर रहे थे। स्वयं बिरसा भी 3 फरवरी 1900 को चक्रधरपुर के जमको पाई जंगल से अंग्रेजों द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया। जेल में उन्हें हैजा हो गया और 9 जून 1900 को रांची जेल में उनकी मृत्यु. हो गई।

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