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विद्रोही ने राव इंद्रजीत को बताया सजावटी मंत्री 

Ved-Prakash-Vidrohi
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 4 मार्च 2021- स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष एवं हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता वेदप्रकाश ने नवगठित 6 सदस्यीय हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग में भाजपा को सबसे अधिक एकतरफा जनसमर्थन देेकर प्रदेश में देाबारा भाजपा खट्टर सरकार बनाने का रास्ता साफ करने वाले अहीरवाल क्षेत्र के साथ दोयम दर्जे का सौतेला व्यवहार करने की कठोर आलोचना की। विद्रोही ने कहा कि 6 सदस्यीय कर्मचारी चयन आयोग में अहीरवाल क्षेत्र का मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर द्वारा एक भी सदस्य न बनाकर घोर उपेक्षा करने के बाद तो सरकार भक्त अहीरवाल क्षेत्र की आंखे खुल जानी चाहिए और उन्हे गंभीरता से विचारना चाहिए कि भाजपा को एकतरफा समर्थन देने बदले में उन्हे मिल क्या रहा है? पांच बार के सांसद व हरियाणा में भाजपा सबसे बडे जनाधार वाले नेता राव इन्द्रजीत सिंह केन्द्र सरकार के मोदी मंत्रीमंडल में महत्वहीन विभाग के राज्यमंत्री है। उनके पास ऐसा कोई ऐसा विभाग नही है, जिसका आम आदमी से कोई लेना-देना हो। एक तरह वे सजावटी मंत्री है। वहीं प्रदेश में खट्टर सरकार में अहीरवाल क्षेत्र के डेढ़ मंत्री है और उनके पास भी ऐसे महत्वहीन विभाग है जिससे उनका मंत्री होना या न होना बेमानी है। 

विद्रोही ने कहा कि विगत 6 साल से दक्षिणी हरियाणा में कांग्रेस जमाने के सभी विकास प्रोजेक्ट अटके पड़े है। धन अभाव में क्या तो उन पर काम नही हो रहा या कछुआ गति से हो रहा है। बड़े विकास प्रोजेक्टों की घोषणा तो होती है, पर उन्हे जमीन पर उतारने के लिए लोगों को जनसंघर्ष करना पड़ता है। मनेठी एम्स इसका जीवंत प्रमाण है। रेल व सड़क अंडरपास तक बनवाने के लिए धरने, प्रदर्शन, अनशन करने पड़ते है। अधूरे पड़े विकास योजनाओं के लिए धन के लिए मुख्यमंत्री के सामने गिडगिडाना पड़ता है, पर फिर भी पर्याप्त बजट नही मिलता है जिसके कारण विकास योजनाएं अटकी पडी है। 

विद्रोही ने कहा कि हरियाणा कर्मचारी चयन आयेाग जैसे सबसे महत्वपूर्ण आयोग जो प्रदेश में युवाओं को सरकारी रोजगार देने की एजेंंसी है, उसमें भी इस क्षेत्र का सदस्य नही बनाने के बाद यह सवाल स्वभाविक है कि आखिर भाजपा को जनमसर्थन देने की एवज में अहीरवाल को उपेक्षा, सौतेलापन के अलावा मिला क्या है? जब मुख्यमंत्री, मंत्री, भाजपा सांसद, विधायक काले कृषि कानूनों के कारण प्रदेश में कहीं भी राजनीतिक व सार्वजनिक कार्यक्रम करने में असमर्थ है तो तब भी वे अहीरवाल में आकर इस क्षेत्र को दास समझकर कृषि कानूनों पर धडल्ले से उपदेश झाड़कर चले जाते है और पत्ता भी नही हिलता। विद्रोही ने किसान व खेती बाहुल्य दक्षिणी  हरियाणा के लोगों से पूछा कि सरकार की इस अंधी भक्ति में उन्हे मिला क्या है? वे अपने किसान धर्म के साथ धोखाधडी करने के बाद भी ऐसी उपेक्षा के बाद भी क्या वे सरकारी भक्ति करके क्षेत्र को शर्मसार करते रहेंगे।

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