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हाथरस काण्ड, बार-बार बयान बदल रही पीड़िता की माँ पर ही उठने लगे सवाल 

Hathras-Case-Update
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नई दिल्ली- हाथरस केस में पीड़िता के परिजन सीबीआई जांच से मना कर रहे हैं। नार्को टेस्ट से मना कर रहे हैं जिसके बाद अब उन्ही पर सवाल उठने लगे हैं। पीड़िता की माँ के कई बयानों के वीडियो वायरल हो रहे हैं। घटना वाले दिन उनके बयान में कुछ और था। बाद में कुछ और अब कुछ और। पहले वो सिर्फ संदीप पर आरोप लगा रहीं थीं और उसके बाद चार नाम सामने आ गए। उनके पहले दिन का बयान इस वीडियो में है। इसमें पुरानी रंजिश का मामला बताया जा रहा है। इस मामले में पहले पीड़िता का बयान फिर माँ का बयान देखें
इस मामले की बात करें तो एक आरोपी रामू उस दिन गांव में ही नहीं था। रामू के पिता राकेश ने मीडिया को बताया कि खेतीबाड़ी से पूरे घर परिवार का गुजारा नहीं होता है, इसलिए कुछ बच्चे बाहर भी काम करते हैं। घटना के दिन जो बच्चे घर से बाहर थे, उनको भी नामजद करा दिया गया है।  उनका बेटा रामू उस वक्त चंदपा में दूध के प्लांट पर ड्यूटी पर था। प्लांट के मालिक ने भी इसकी पुष्टि की है जिनका कहना है कि उस दिन रामू ड्यूटी पर था।
कल तमाम मीडिया वाले मौके पर पहुंचे जिसके बाद पीड़िता की माँ के बयान फिर बदल गए। अब वो चार लोगों के नाम बता रहीं हैं। बोल रहीं है कि बेटी की जीभ कटी थी, वो कुछ बोल नहीं पा रही थी जबकि पहले वाले वीडियो में पीड़िता साफ़ बोलती दिख रही है। अब सवाल उठ रहे हैं कि वो बार-बार बयान क्यू बदल रहीं हैं। पहले सिर्फ संदीप और अब चार आरोपी के नाम क्या किसी दबाव में या किसी के कहने पर? कल वहां गईं बरखा दत्त का वीडियो देखें
इस मामले की बात करें तो बरखा दत्त मामले में नया मोड़ ले आई हैं। अब पीड़िता के परिजन गांव छोड़ने की बात कर रहे हैं। शायद उन्हें किसी ने ऐसा करने को कहा है क्यू कि कई आडियो भी वायरल हो रहे हैं जिनमे कुछ लोग पीड़िता के भाई से कह रहे हैं कि प्रियंका गांधी वहां जा रहीं है। ऐसा बोलना, वैसा बोलना।
आरोपियों के परिजनों ने मीडिया को बताया किया उन्हें पीड़ित परिवार के साथ एक पुराने पारिवारिक झगड़े के आधार पर गैंगरेप और हत्या के झूठे आरोप में फंसाया गया है। हाथरस गैंगरेप मामले में गिरफ्तार आरोपी रामू की मां ने दावा किया है कि दोनों परिवारों के बीच दो दशक पहले पारिवारिक झगड़ा हुआ था और उनके परिवार के दो सदस्य एससी/एसटी अधिनियम के तहत जेल गए थे।

उन्होंने कहा कि संदीप के पिता नरेंद्र और आरोपी रवि 2001 में पीड़िता के दादा पर हमला करने के आरोपी थे। रवि उस समय 13 साल का था। उन्होंने इंडिया टुडे टीवी को बताया, 'उन पर मारपीट करने का झूठा आरोप लगाया गया था। मृत लड़की के दादा ने हमारे परिवार के दो सदस्यों को जेल भेजने के लिए खुद को चोट पहुंचाई थी।'

चार आरोपियों में से तीन रामू, संदीप और रवि रिश्तेदार हैं और पीड़ित के घर से लगभग 100 मीटर की दूरी पर रहते हैं। पीड़ित परिवार ने हालांकि कहा कि इस घटना का पुराने पारिवारिक झगड़े से कोई लेना-देना नहीं है और 14 सितंबर की घटना पूर्व नियोजित थी। ये आडियो सुनें, ऐसे कई आडियो सामने आ रहे हैं। 
 इस मामले की सच्चाई तो कुछ और ही लगती है। हरियाणा के फरीदाबाद के सुनपेड़ जैसी घटना लगती है जहाँ 20 अक्टूबर 2015 को बच्चों को जलाने का मामला सामने आया था और कई आरोपी बनाये गए थे। बड़े-बड़े नेता पहुंचे थे और मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी लेकिन अब तक कुछ सामने नहीं आया। उस वक्त सुभाष यादव फरीदाबाद के पुलिस कमिश्नर थे। वहां पुरानी रंजिश के कारण ये घटना घटी बताई गई और कहा गया कि पति-पत्नी में रंजिश थी। बच्चों को जला दिया। आरोप पुराने दुश्मनों पर लगा दिया।
हाथरस  का सच जल्द सामने आएगा। पीड़िता की मौत हुई है उसे इन्साफ मिलना चाहिए लेकिन किसी निर्दोष को सजा भी नहीं मिलनी चाहिए। उत्तर प्रदेश में डेढ़ साल बाद विधानसभा चुनाव हैं इसलिए कुछ नेता यहाँ राजनीति चमकाने भी पहुँच रहे हैं। कुंडा के विधायक राजा भैया का ट्वीट पढ़ें। 
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