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विद्रोही ने हरियाणा के मंत्री को दी बिना मांगे ये सलाह

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6 सितम्बर 2020- स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष एवं हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता वेदप्रकाश विद्रोही ने आमजन की हैसियत से भाजपा-जजपा सरकार के राज्यमंत्री औमप्रकाश यादव को बिना मांगे सलाह दी कि नारनौल की पूर्व जिला पुलिस अधीक्षक द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से उनके खिलाफ नारनौल थाने में दर्ज करवाई गई एफआईआर को वापिस लेेन के लिए मुख्यमंत्री मनोहरलाल से गुहार करके अपने को छोटा व कमजोर व्यक्ति प्रदर्शित करने की बजाय उक्त एफआईआर की जांच का दिलेरी सेे सामना करना चाहिए। विद्रोही ने कहा कि नारनौल के भाजपा विधायक व हरियाणा सरकार के मंत्री औमप्रकाश यादव ने कुछ गलत नही कहा और नही किया तो वे मुख्यमंत्री से एफआईआर वापिस लेने की गुहार क्यों कर रहे है? कटु सत्य यही है कि दक्षिणी हरियाणा के निर्वाचित जनप्रतिनिधि वर्षो से सत्ता के सामने झुककर, गुहार करके दक्षिणी हरियाणा के राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक हितों को बलिवेदी पर चढ़ाते आये है। जनप्रतिनिधियों के इस कमजोर, सत्तालोलूप रवैये के चलते ही विभिन्न सरकारों के मुख्यमंत्रीयों ने दक्षिणी हरियाणा के साथ सौतेला व भेदभावपूर्ण व्यवहार किया। 

विद्रोही ने कहा कि दक्षिणी हरियाणा के साथ विकास में आज तक हो रहे भेदभाव के लिए इस क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की यही झुककर चलने का रवैया जिम्मेदार है। हमारे नेताओं ने क्षेत्र की जनता को संघर्ष से अपनपा हक लेने को प्रोत्साहित करने की बजाय सत्ताधारियों की चापलूसी करके निजी हिता साधना सिखाया है जनप्रतिनिधियों के इस दब्बूपन का फायदा उठाकर हर मुख्यमंत्री ने इस क्षेत्र को उसका वाजिब हक अभी तक नही दिया। जब तक इस क्षेत्र के जनप्रतिनिधि अपनी रीढ़ पर खडे होकर अपने हक, स्वाभिमान के लिए नही लड़ेंगे तो कोई भी पुलिस अधिकारी भविष्य में इसी तरह मंत्रीयों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की हिमाकत करता रहेगा।

 विद्रोही ने कहा कि यदि कोई प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी भ्रष्ट है व इलाके और लोगों के हितों के खिलाफ काम करता है तो उसे भ्रष्ट बताने व उसके खिलाफ आवाज उठाकर लडने में डर किस बात का। औमप्रकाश यादव को भी अपनी रीढ़ पर खड़े होकर मुख्यमंत्री से एफआईआर वापिस लेने की गुहार करने की बजाय जांच का सामना करना चाहिए व कथित भ्रष्ट पुलिस अधिकारी को उसके कृत्यों की सजा दिलवाने की जोरदार पहल करनी चाहिए। विद्रोही ने कहा कि यदि ऐसा न करके एफआईआर वापिस लेने की गुहार करते रहेंगे तो एक तरह से वे क्षेत्र के स्वाभिमान को ही जाने-अनजाने में कमजोर करने की गलती करेंगे। 
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