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बहुत दुखी हैं 75 पार की हवा में बहकर भाजपा के पाले में गिरे हरियाणा के तमाम पूर्व विधायक

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चंडीगढ़ - लगभग एक साल पहले हरियाणा में विधानसभा चुनावों के पहले प्रदेश के लगभग दो दर्जन पूर्व विधायक 75 पार की हवा में बह गए थे और भाजपा के खेमे में पहुँच गए थे। कई ऐसे नेता उस समय भाजपा में शामिल हुए थे जो उस समय विधायक थे लेकिन उन्हें भी टिकट नहीं मिली थी। उन्हें लगता था कि कहीं न कहीं से भाजपा उन्हें टिकट जरूर देगी लेकिन कुछ ही विधायकों को चुनावों में टिकट मिली। जिन्हे टिकट नहीं मिली वो सब भाजपा से नाराज हैं। कई पार्टियों के पूर्व विधायक उस दौरान भाजपा में शामिल हुए थे। एक साल होने को हैं। उनमे तमाम अभी भाजपा में ही है लेकिन भाजपा से नाराज हैं क्यू कि अब वो भाजपा में बिन बुलाये मेहमान की तरह हैं जिन्हे बिलकुल भाव नहीं मिल रहा है। भाजपा के पट्टे के अलांवा उनके पास कुछ नहीं है। सभी साइड लाइन लगा दिए गए हैं। 

 अब ऐसे पूर्व विधायक किसानों के मुद्दे पर किसानों की आवाज उठाते देखे जा रहे हैं। भाजपा को इसकी भनक लग गई है और अब प्रदेश अध्यक्ष ओपी धनकड़ को आगे किया गया है ताकि वो इन पूर्व विधायकों को मना सकें। कई पूर्व विधायकों की दो दिन पहले पंचकूला के जिमखाना क्लब में बैठक भी हो चुकी है। अब प्रदेश अध्यक्ष इन्हे कैसे मनाते हैं समय बताएगा। वैसे ये सब भाजपा छोड़ने का प्लान बना चुके हैं। इन कहना है कि हम किसानों, महिलाओं, युवाओं की आवाज बुलंद कर अपने समय में विधायक बने थे लेकिन वर्तमान में इन सबको परेशान किया जा रहा है। युवा बेरोजगार हो रहे हैं। किसान सड़क पर हैं और महिलाओं के प्रति अपराध भी बढ़ता जा रहा है। 

जुलाना के पूर्व विधायक परमिंदर सिंह ढुल जो अब भाजपा में हैं वो लगातार किसानों का मुद्दा उठा रहे हैं। उन्होंने फेसबुक पर लिखा है कि किसानों की सभी जायज मांगों का समर्थन करता हूँ। किसान इस देश की रीढ़ हैं। सरकार उनके जायज विरोध को राजनैतिक बताने की भूल न करे। किसान यदि रूठ गया तो बड़े बड़े सिंहासन डोल जाएंगे।

पूर्व विधायक ने कहा है कि  ये बिल सर छोटू राम के सपनों के खिलाफ हैं, ऐसे में हम इनका समर्थन नहीं कर सकते. उन्होंने कहा कि कोरोना संकट में जब देश के सामने संकट आया तो किसानों ने ही अर्थव्यवस्था को जारी रखा, लेकिन अब किसान सड़क पर है और कोई उनकी बात नहीं सुन रहा है। उनके इस तेवर को देख लग रहा है कि वो अपनी सरकार से  खुश नहीं हैं और पंचकूला की बैठक में वो भी शामिल बताये जा रहे हैं। आपको बता दें कि ढुल दो बार इनेलो के विधायक रह चुके हैं। 2009 और 2014 में विधायक थे लेकिन 2019 में भाजपा में शामिल हुए और जजपा के उम्मीदवार से चुनाव हार गए थे। 

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