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दिल्ली में हिंसा करवा 53 लोगों की जान ले चुकी जामियां की जहरीली नागिन गर्भवती हुई, बचाने में जुटे अर्बन नक्सली 

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नई दिल्ली: 10 दिसंबर 2019 को राज्य सभा में और 11 दिसंबर को लोकसभा में नागरिकता संशोधन क़ानून पारित हुआ था और 12  दिसम्बर को भारत के राष्ट्रपति ने इसे अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी और यह विधेयक एक अधिनियम बन गया। और 10 जनवरी 2020  से यह अधिनियम प्रभावी भी हो गया। 20  दिसम्बर 2019  को पाकिस्तान से आये ७ शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देकर इस अधिनियम को लागू भी कर दिया गया था लेकिन 10 दिसंबर की रात से ही देश में एक बड़ा खेल शुरू हो गया था और एक पार्टी सहित देश के अर्बन नक्सली, कट्टरवादी संगठन, चरमपंथी, वामपंथी, टुकड़े-टुकड़े गैंग सहित आवार्ड वापसी गैंग, मोमबत्ती गैंग जैसे तमाम तथाकथित गैंग और उनके गुर्गों ने एक जाल बुनना शुरू कर था और 22 दिसंबर को उत्तर प्रदेश में हिंसा करवा लगभग दो दर्जन बेगुनाहों की जान ले ली थी। इसी दौरान जामिया, जेएनयू सहित कई जगहों पर भी उत्पात मचाया गया। एक शाहीन बाग़ की शुरुआत कर देश में कई शाहीन बाग़ बनाये गए और इन जगहों से भड़काऊ भाषण जारी रहे। जामिया में भी हिंसा हुई। दिल्ली के अन्य जगहों पर हिंसा हुई।  24 फरवरी को हिंसा के दौरान पुलिस पर हमला हुआ जिसमे डीसीपी अमित शर्मा, एसपी अनुज शर्मा और सिपाही रतन लाल गंभीर रूप से घायल हुए और सिपाही रतन लाल की गोली लगने से मौके पर ही मौत हो गई थी। 

ये सब अपने आप नहीं हो रहा था। हिंसा करवाई जा रही थी और हमने ऊपर जिन गैंगों का नाम लिखा है वही गैंग दिल्ली में हिंसा करवा रहा था। लोगों को नागरिकता संशोधन क़ानून के नाम पर भड़का रहा था और इस गैंग के भड़काने से ही शाहीन बाग़ की सड़क लगभग 100 दिन ब्लाक रही। इस गैंग के तमाम गुर्गों को पीएफआई फंडिंग कर रही थी जैसा की कि दिल्ली पुलिस इस बारे में खुलाशा कर चुकी है। ये केंद्र सरकार शाहीन बाग़ पर ध्यान नहीं दे रही थी और ये गैंग कुछ बड़ा करना चाहता था इसलिए गैंग ने बड़ी साजिश के तहत दिल्ली में उस समय दंगा करवा दिया जब अमेरिकी राष्ट्रपति आये थे और इस दंगे में 53 बेगुनाहों की जान चली गई। 

20 दिसंबर को ही हरियाणा अब तक ने अपने पाठकों को बता दिया था कि कुछ लोग लाशें गिनना चाहते हैं और एक दिन बाद उत्तर प्रदेश में हिंसा हो गई और उसके बाद में हमने अपने पाठकों को बताया कि अर्बन नक्सली और कुछ गैंग ज्यादा से ज्यादा लाशें चाहते हैं और दिल्ली में हिंसा हो गई। अब आते हैं असली बात पर तो दिल्ली हिंसा में कई लोग गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेजे गए हैं जिनमे जामिया की छात्रा सफूरा जरगर भी जेल में हैं और वो  चर्चा में इसलिए हैं क्यू कि जेल में मेडिकल परीक्षण के दौरान वो गर्भवती पाई गईं हैं। सोशल मीडिया पर कोई लिख रहा है कि वो बिन व्याही माँ बनने वाली हैं तो कोई उनकी शादी की तस्वीरें पोस्ट कर रहा है। वो जामिया की छात्रा हैं ये सच है। शादी हुई या बिन ब्याही हैं इसका कोई पता नहीं। ऊपर हमने जितने गैंग के नाम लिखे हैं वो गैंग सफूरा जरगर को बचाने में जुटा है। ट्विटर पर कई तरह के ट्रेंड आप देख सकते हैं। सफूरा जरगर के बारे में जहाँ तक हरियाणा अब तक को पता है उसके मुताबिक़ इन दंगों के पीछे बहुत बड़ी साजिश थी।  जिसकी एक अहम कड़ी सफूरा जरगर से जाकर जुड़ती है।  दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की जांच में पता चला है कि संसद के दोनों सदनों से पारित नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ सफूरा जरगर लगातार भड़काऊ भाषण देकर लोगों को उकसाती थी। पुलिस को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे के दौरान सफूरा जरगर के चांदबाग में दंगाइयों के साथ होने और दंगे की साजिश रचने की भी ठोस जानकारी मिली है। 

दिल्ली पुलिस ने 11 अप्रैल को बयान जारी करके बताया कि 22 फरवरी की रात नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के विरोध में महिलाएं जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे बैठ गई थीं।  दिल्ली पुलिस के हवाले से जानकारी मिली है कि उसी दौरान सफूरा भारी हिंसक भीड़ को लेकर वहां पहुंची और दिल्ली को दंगों की आग में झोंकने की साजिश रची।  इसके बाद जिले में कई दिनों तक हिंसा होती रही. जिसमें 53  लोगों की जान चली गई। इसी अपराध में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर तिहाड़ भेजा और मेडिकल जांच में वो गर्भवती पाई गईं और अब अर्बन नक्सलियों सहित आतंकी एवं अन्य गैंग उन्हें बचाने के लिए ट्विटर पर तरह तरह के ट्रेंड चला रहे हैं। जामिया में कई जहरीली नागिन हैं शायद, सुबह अपने पाठकों को बताया था कि हाल में शहीद हुए कई जवानों को एक नागिन ने युद्ध अपराधी बताया था जिसके बाद देश के लोग उसे लताड़ना शुरू कर दिए। इनमे से अधिकतर गैंग का साथ एक बड़ी पार्टी भी देती है और यही वजह है कि ये पार्टी केंद्र से काफी दूर होती जा रही है। शायद ही 20 साल तक इस पार्टी को केंद्र में सरकार बनाने का मौका मिले। सच कड़वा होता है लेकिन सच तो सच होता है जिसे लगे लगता रहे। 
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