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हरियाणा पर थोपे CM खट्टर पर भड़का गुर्जर समाज, पूंछा क्या रानी नागर का गुर्जर होना गुनाह है?

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नई दिल्ली- हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल का आज जन्मदिन है। तमाम नेता उन्हें जन्मदिन की बधाइयाँ देते दिख रहे हैं तो कुछ लोग उन्हें घेर भी रहे हैं क्यू कि कल ही आईएएस अधिकारी रानी नागर ने स्तीफा दिया था जिससे हरियाणा के गुर्जर समाज के लोग सीएम खट्टर को कल से ही खरी खोटीसुना रहे हैं। उन्हें थोपा हुआ सीएम कहा जा रहा है और कहा जा रहा है कि हरियाणा के CM को जन्मदिन मनाने का कोई हक नहीं है, उनके राज में एक महिला IAS ने इस्तीफा दे दिया और आप बेटी बचाओं का नारा देते हैं।। क्या रानी नागर जी का गुर्जर होना गुनाह  है, इसलिए गुलाटी पर कारवाई नहीं हुई।
सीएम के पहले कार्यकाल में भी कुछ लोग आवाज उठा रहे थे कि एक खास समुदाय के लोगो का वो खास ध्यान रख रहे हैं उस समाज के अधिकारीयों को मलाईदार पदों पर बिठा रहे हैं और यही कारण है कि गत वर्ष विधानसभा चुनाव के दौरान जाट वर्ग उनके खिलाफ लामबंद हो गया था और भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिली। दुष्यंत की वैशाखी लेकर खट्टर चंडीगढ़ पहुंचे। अब गुर्जर समाज के लोग भी काफी नाराज दिख रहे हैं।

 अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा का कहना है  कि इसका गलत असर समाज की बेटियों पर पड़ेगा। प्रदेश और केंद्र सरकार ने कोई गंभीर कदम न उठाकर ये बेटियों का अपमान किया है। संगठन के जिलाध्यक्ष श्याम सिंह भाटी ने कहा कि रानी नागर के इस कदम से समाज की जो अन्य बेटियां अधिकारी बनने का सपना देख रही हैं, उनके दिमाग पर गहरा असर पड़ेगा। यह इस्तीफा भाजपा सरकार सरकार की ओर से महिला सुरक्षा को लेकर किए जा रहे सारे दावों की पोल खोल रहा है।

आपको फिर बता दें कि हरियाणा की 2014 बैच की आईएएस रानी नागर ने कल  इस्तीफा दे दिया बताया जा रहा है कि रानी नागर का आईएएस सुनील गुलाटी से कोर्ट में विवाद चल रहा है और कल जब उन्होंने स्तीफा दिया था तब लिखा था कि  - मैं समाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में एडिशनल डायरेक्टर के पद पर तैनात हूं। पिछले 2 साल से मुझे यूटी (चंडीगढ़) गेस्ट हाउस में सिर्फ 1 कमरे के मकान में समय व्यतीत करना पड़ रहा है। कई बार मांगने पर मुझे मकान नहीं दिया गया। मैं और मेरी बहन 1 कमरे के मकान में रह रहे हैं। 1 कमरे में दो महिलाओं का रहना बड़ा मुश्किल है जिसको लेकर हमें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। जान का खतरा भी बना रहता था लॉकडाउन के दौरान मेरी जान को खतरा बढ़ता जा रहा था। इस स्थिति में मेरे लिए ड्यूटी करना बहुत ही मुश्किल था। जिसको लेकर मैंने आईएएस पद से त्यागपत्र देना उचित समझा। 
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