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बहुत मुश्किल है सबको खुश रखना, चिराग जलते ही अंधेरे तो बुझ ही जाते हैं- खट्टर 

Haryana Vidhan Sabha in Chandigarh
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चंडीगढ़, 4 मार्च- हरियाणा के मुख्यमंत्री  मनोहर लाल ने कहा कि किसी भी सरकार का बजट आगामी एक वर्ष के साथ-साथ पिछले वर्ष की चल रही योजनाओं का लेखा-जोखा होता है। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में सडक़ तंत्र तथा अन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के भौतिक विकास के साथ-साथ लोगों के खुशहाली व समृद्धि के लिए व्यवस्था सुधारने का कार्य सरकार ने किया है और भविष्य में भी यह कार्य बेहतरी के साथ किया जाएगा।

        मुख्यमंत्री आज हरियाणा विधानसभा में चल रहे बजट सत्र के दौरान बजट अभिभाषण पर चर्चा के बाद अपने उत्तर में सदन में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि मुख्यमंत्री के साथ-साथ उन्होंने वित्त मंत्री के रूप में अपना पहला बजट पेश किया है, जिसका जिक्र उन्होंने बजट अनुमानों के आठवें बिंदू पर किया है, जिसमें कहा गया है कि जिसमें सभी विभागों के लिए धनराशि का आवंटन इस प्रकार कर पाया हूं, जिसमें हर दिन सुबह जल्दी उठकर खेतों, फैक्ट्रियों और दुकानों की तरफ काम पर जाने वाला हर मेहनतकश आम हरियाणवी अपने जीवन को सुगम होता और अपनी आय को बढ़ता हुआ पाएगा। अपने बच्चों को सरकारी स्कूल छोड़ते समय सभी हरियाणवी आश्वस्त होंगे कि उनके बच्चों को वहां अच्छी शिक्षा मिलेगी।

        मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने कहा कि सदन के कुछ सदस्यों द्वारा प्री-बजट चर्चा के लिए बुलाई गई बैठकों को मात्र औपचारिकता बताए जाने पर उन्हें पीड़ा हुई है जबकि यह है कि दो महीने कड़ी मेहनत कर उन्होंने यह बजट तैयार किया है। बजट अभिभाषण में हर विभाग को शामिल होना जरूरी नहीं, वित्त वर्ष 2014-15 के कांग्रेस सरकार के बजट अभिभाषण में 33 विभागों का जिक्र किया गया था, जबकि वित्त वर्ष 2020-21 के बजट अभिभाषण में 38 विभागों का जिक्र किया गया है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर विपक्ष का संशय तत्कालीन वित्त मंत्री श्री हरमोहिन्द्र सिंह च_ा  द्वारा प्रस्तुत किये गए वित्त वर्ष 2014-15 की प्रति दिखाकर उसमें से आंकड़ों का जिक्र करके दूर कर दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को पीड़ा है कि उन्हें सदन में ईधर से ऊधर बिठा दिया है।

 मनोहर लाल ने कहा कि उन्हें खुशी है कि इस बजट सत्र के दौरान बजट अभिभाषण पर तीन दिन तक 64 विधायकों ने चर्चा की है। उन्होंने कहा कि बजट अनुमान और संशोधन अनुमान में फर्क होता है। वर्ष 2005 से 2014-15 के बजट अनुमान 81.92 प्रतिशत तक पूरे हुए थे, जबकि वर्ष 2015-16 का बजट अनुमान 109 प्रतिशत तक पूरा हुआ। उन्होंने कहा कि बजट में बजट अनुमानों में वृद्धि प्रतिशतता दो तरह से होती है, एक तो कुल बजट में बढ़ाई गई प्रतिशतता तथा दूसरी किसी भी विभाग के पिछले वर्ष के आवंटित बजट में वृद्धि करना या घटाया जाना।

        विपक्ष द्वारा प्रदेश पर ऋण भार बढ़ाए जाने को भी गलत बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली कम्पनियों का लगभग 27000 करोड़ रुपये का घाटा 75 प्रतिशत उदय स्कीम के तहत मौजूदा सरकार द्वारा अपने खातों में लेने से प्रदेश पर ऋण भार बढ़ गया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015-16 से उदय स्कीम का प्रत्यक्ष रूप से बजट पर असर रहा है। अब जुलाई, 2019 के बाद इसकी अंतिम किस्त पूरी हो गई है।

        मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने कहा कि वर्ष 1999 में भी हरियाणा राज्य बिजली बोर्ड के घाटे को इसी तरह सरकार ने अपने खातों में लिया था और उसके बाद बिजली निगमों की कम्पनियां बनी। वर्ष 1999 में 414 करोड़ रुपये घाटा था, जो निरंतर बढ़ता रहा और यह वर्ष 2015-16 में  34600 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वर्ष 2015-16 में उदय स्कीम आने के बाद इसका 50 प्रतिशत घाटा अर्थात 17300 करोड़ रुपये सरकार ने अपने खातों में लिया और बाद में हर वर्ष 25 प्रतिशत के घाटे को पूरा किया गया, जो जुलाई, 2019 तक पूरा हो गया।

        मुख्यमंत्री ने सदन को इस बात से अवगत करवाया कि वित्त वर्ष 2010-11 में बिजली कम्पनियों का घाटा 6505 करोड़ रुपये था, जो अचानक वित्त वर्ष 2011-12 में बढकऱ 19708 करोड़ रुपये हो गया। उन्होंने कहा कि यह भी एक आश्चर्यचकित तथ्य है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले की जांच करवाई जाएगी कि अचानक एक साल के अंतराल में यह वृद्धि कैसे हुई। उन्होंने कहा कि उनके पास वर्ष 1966 से लेकर वर्ष 2020-21 तक के बजट के आंकड़ें उपलब्ध हैं और वे एक-एक तथ्य पर गहनता से गए हैं और यदि किसी सदस्य को आपति है तो वह किसी भी कोर्ट या जांच एजेंसी के पास जा सकता है।
 मनोहर लाल ने कहा कि चर्चा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि आर्थिक सर्वे में प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 2 लाख 36 हजार रुपये है तथा वर्ष 2020-21 के बजट सारांश में यह 2 लाख 83 हजार 961 रुपये दर्शाया गया है, जो सही नहीं है बल्कि वास्तिविकता यह है कि सदन के पटल पर जो आर्थिक सर्वे रखा गया था वह वर्ष 2018-19 का था। इसी प्रकार, अगला आर्थिक सर्वे वर्ष 2019-20 का आएगा जो एक निरंतर प्रक्रिया है। मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने कहा कि जब कैग की रिर्पाट सरकार को मिलती है तो उसी समय सदन में रख दी जाती है। कैग एक संवैधानिक संस्था है और यह सरकारों को अपने सुधार के लिए सुझाव देता है। उन्होंने कहा कि इस बार भी कैग ने सरकार को वित्त वर्ष 2017-18 में विभिन्न विभागों की छ: रिपोर्टेँ दी गई, जिन्हें सदन में रखा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कैग की रिपोर्ट वे कभी नहीं छुपाएंगे।

        मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2018-19 में राज्य की सकल घरेलू उत्पाद दर 7.5 प्रतिशत थी, जबकि वर्ष 2019-20 में यह बढकऱ 7.7 प्रतिशत हुई और उन्हें आशा है कि राज्य की सकल घरेलू उत्पाद दर वर्ष 2020-21 में इससे भी अधिक होगी।

        मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने सदन में शायराना अंदाज में विपक्ष को जवाब देते हुए कहा कि-

                       बहुत मुश्किल है सबको खुश रखना,

                       चिराग जलते ही अंधेरे तो बुझ ही जाते हैं।
मुख्यमंत्री ने सदन को अवगत करवाया कि एक वित्त मंत्री के रूप में जब उन्होंने पिछले सरकारों के समय बजट खर्च का अध्ययन किया तो उन्हें पता चला तो कांग्रेस के वर्ष 2005 से वर्ष 2014 तक के 10 वर्षों के कार्यकाल के दौरान लोक निर्माण (भवन एवं सडक़ें) द्वारा प्रदेश में सडक़ों के निर्माण पर 2572 करोड़ रुपये खर्च किये गए थे, जबकि हमारी सरकार ने वर्ष 2015 से वर्ष 2020 तक 4992 करोड़ रुपये खर्च किये। इसी प्रकार, आरओबी और आरयूबी पर कांग्रेस सरकार अपने 10 वर्षों के कार्यकाल में न के बराबर खर्च किये, जबकि हमारी सरकार के कार्यकाल में अब तक इस पर 1062 करोड़ रुपये खर्च किये गए हैं। इसी प्रकार, कांग्रेस ने 10 वर्षों में भवनों के निर्माण पर 272 करोड़ रुपये खर्च किये थे, जबकि हमने पिछले पांच वर्षों में 2429 करोड़ रुपये खर्च किये। उन्होंने कहा कि जनता का पैसा जनता में लगना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी प्रकार, कांग्रेस सरकार द्वारा इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय मीरपुर (रेवाड़ी), चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय भिवानी, चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय जींद तथा बी.आर.अम्बेडकर विश्वविद्यालय पर 102 करोड़ रुपये खर्च किये गए थे, जबकि हमने इन सब पर 500 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किये।  

        मुख्यमंत्री ने कांग्रेस सरकार द्वारा पंचकूला में राष्ट्रीय फैशन डिजाइन संस्थान के लिए जमीन उपलब्ध करवाई परंतु इस संस्थान के साथ समझौता ज्ञापन में प्रदेश के युवाओं के लिए 10 प्रतिशत सीटों का कोई प्रावधान नहीं किया। इसी प्रकार, एक अन्य संस्थान के साथ सरकार की जमीन भी गई और प्रदेश को कोई लाभ भी नहीं हुआ।
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