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हजारों करोड़ का घोटाला, हरियाणा के 15 IAS जांच के घेरे में, फेरस के निवेशकों में आई जान 

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चंडीगढ़: कभी-कभी कुछ बिल्डरों पर बड़े आरोप लगते हैं। उन पर तमाम एफआईआर भी दर्ज हो जाती हैं लेकिन एफआईआर दर्ज होने के बाद भी पुलिस अधिकारियों के दफ्तरों में वो ऐसे पहुँचते हैं जैसे किसी रिश्तेदार के घर आये हो। कोई डर नहीं रहता जबकि उन पर संगीन धाराओं में मामले दर्ज होते हैं। इसका प्रमुख कारण ये है कि उन पर ऐसे किसी बड़े अधिकारी का हाथ होता है जिस सच में बड़ा होता है, आईएएस लेवल के अधिकारी भी इन ठगों को संरक्षण देते हैं इस कारण मजबूरन पुलिस अधिकारी उन पर कोई कार्यवाही नहीं कर सकते। फरीदाबाद का एक ठग शायद इसी वजह से बच रहा है। फेरस के बिल्डरों पर कई बड़े मामले दर्ज होने के बाद भी उनकी गिरफ्तारी नहीं हो रही है और शहर के सैकड़ों लोगों को सैकड़ों करोड़ रूपये का चूना लगा आराम  कर रहे हैं। 

बिल्डरों और अधिकारियों के गठजोड़ की बात करें तो हरियाणा के 15 आईएएस अधिकारी कभी भी नप सकते हैं। हरियाणा के लोकायुक्त जस्टिस एनके अग्रवाल ने अब मान लिया है कि गुरुग्राम-सोहना रोड स्थित मलिबू टाउन कालोनी में हजारों करोड़ का घोटाला हुआ है। जस्टिस अग्रवाल ने माना है कि कालोनाइजर्स और डेवलपर्स ने Town and Country Planning Department के अधिकारियों के साथ मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया। लोकायुक्त ने वर्ष 2011 की एक शिकायत के आधार पर वर्ष 1991 से अब तक Town and Country Planning Department के महानिदेशकों, विभागीय अधिकारियों और कालोनाइजरों के बीच रिश्तों की जांच के लिए एसआइटी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) बनाने के आदेश दिए हैं।

वर्ष 1991 से लेकर अब तक 15 IAS अधिकारी Town and Country Planning Department के महानिदेशक पद पर कार्यरत रहे हैं। इनमें अधिकतर रिटायर हो गए और कुछ अभी भी काम कर रहे हैं। इनके अलावा चीफ टाउन प्लानर, सीनियर टाउन प्लानर और डिस्ट्रिक्ट टाउन प्लानर भी इस घोटाले में शामिल बताए जाते हैं। लोकायुक्त के आदेश को गंभीरता से लेते हुए हरियाणा सरकार ने यदि एसआइटी गठित की तो उक्त सभी सीनियर IAS जांच के दायरे में शामिल होंगे। जस्टिस अग्रवाल ने भ्रष्टाचार निरोधक दिवस के मौके पर ये आदेश दिया जिसके अब अफरा-तफरी मची है। 

कुछ ऐसा ही हरियाणा के फरीदाबाद जिले में भी हुआ जहाँ फेरस के दो बिल्डरों ने 2012 में अख़बारों में विज्ञापन निकलवाया। आईएमटी से लगती जमीन सेक्टर-70 में इन ठगों ने लोगों को  लग्जरी सुविधाएं जैसे पार्क, स्कूल, अस्पताल, शापिंग कांप्लेक्स, स्वीमिंग पूल आदि का सपना दिखाकर निवेशकों को प्लाट बेच दिया। लोगों से 85 फीसदी तक रकम की वसूली कर ली और इस दौरान वहां कुछ मजदूर लगा दिए कि सड़क सीवर का काम चल रहा है जल्द प्रोजेक्ट पूरा होगा। लोग पैसा जमा करते चले गए। लोगों से 100 करोड़ से ज्यादा वसूल लिए और अब भी वहां कोई बिल्डिंग नहीं बनी। सिर्फ मैदान है। निवेशक कभी पुलिस तो कभी अन्य अधिकारी का चक्कर लगा रहे हैं। एफआईआर भी दर्ज हुई हैं लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। 

अब लोकायुक्त जस्टिस एनके अग्रवाल के इस आदेश से निवेशकों में थोड़ी जान आई है जिनका कहना है कि उन्हें लगता है कि फेरस के ठगों ने भी किसी बड़े अधिकारी से मिलकर सैकड़ों करोड़ का चूना लगाया है। इन्होने निवेशकों को ही नहीं सरकार को भी करोड़ों का चूना लगाया है इसलिए अगर जांच की गई तो कई अधिकारी इसके लपेटे में आएंगे। जल्द निवेशक एक बैठक कर आगे की रणनीति बनाएंगे। 
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