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खटारा निकले खट्टर और उनकी पुलिस, फेरस के ठगों को दे रहे हैं संरक्षण, छलका निवेशकों का दर्द

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चंडीगढ़: प्रदेश के फरीदाबाद जिले में फेरस सिटी के ठगों ने एक और गड़बड़झाला सेक्टर-70 में किया है। ये महाठग लगभग 150 लोगों से 82 करोड़ रूपये से ज्यादा लेकर भाग गए। इन ठगों ने लोगों को आलीशान आशियाने का लालच दिया और लोग इन ठगों के झांसे में आ कर अपनी जमा पूंजी गँवा बैठे। फेरस सिटी के ठगों ने  जिस स्थान पर निवेशकों को आशियाने का सपना दिखाया था वह जमीन आज भी खाली पड़ी है। वहां एक ईंट भी नहीं लगी है। कई निवेशकों के दर्द को समझते हुए हरियाणा अब तक ने आज मौके का दौरा किया तो वहां हमने देखा कि अब भी वो जमीन खाली पडी है। वहां तस्वीर में एक बिल्डिंग दिख रही है जिसके सामने की जमीन फेरस की है। कुछ लोगों का कहना है कि पहले इस बिल्डिंग में फेरस का दफ्तर होता था लेकिन अब शायद किसी और का दफ्तर यहाँ हैं। बिल्डिंग किसी और की बताई जा रही है।  निवेशकों ने दिसंबर 2017 में बिल्डर के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई थी, लेकिन आज तक पुलिस इस मामले में गिरफ्तारी नहीं कर पाई है। निवेशकों का कहना है कि फेरस सिटी के मुखिया  पैसे वाले हैं। पुलिस की जेबें भर  देते हैं इसलिए पुलिस ने उन्हें अब तक गिरफ्तार नहीं किया। 

ये मामला  5 सितंबर 2018 से मामला ग्रीवांस कमेटी में भी चल रहा है। निवेशक आरडी कौशिक, एसएन गर्ग, रविंद्र पाल सिंह, समरेंदर सिंह आदि के अनुसार आईएमटी से लगती जमीन सेक्टर-70 में बिल्डर ने 102 एकड़ जमीन में फेरस इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. नाम से प्लाट और फ्लैट की स्कीम 2012 में लाया था। वर्ष 2015 में इस प्रोजेक्ट काे पूरा करना था। प्रोजेक्ट के तहत लग्जरी सुविधाएं जैसे पार्क, स्कूल, अस्पताल, शापिंग कांप्लेक्स, स्वीमिंग पूल आदि का सपना दिखाकर निवेशकों को प्लाट बेचा था। निवेशकों के अनुसार मौके पर आज वहां 3 से 4 फुट तक गड्ढे हैं। झाड़ियां खड़ी हैं। जबकि 150 से अधिक निवेशकों से करीब 85 से 90 फीसदी तक पैसा जमा कर चुके हैं। करीब 25 निवेशकों के केस अदालतों में चल रहे हैं।

एक जानकारी के मुताबिक ठगों के लाइसेंस कैंसिल होने के बाद निवेशक 2016 से एफआईआर दर्ज कराने के लिए चक्कर काटते रहे हैं। 28 दिसंबर 2017 में कुल 19 निवेशकों ने बिल्डर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। इनमें निवेशक एसएन गर्ग, समरेंद्र सिंह, नरेश कुमार शर्मा, रविंद्र सिंह, गुलशन कुमार, राजेंद्र चौधरी, अनिल कुमार, राजीव कुमार पांडेय, देवेंद्र कुमा गौड़, रामदत्त कौशिक, सीमा शर्मा, कुसुम अग्रवाल आदि शामिल हैं।

रेरा ने बिल्डर कंपनी को नोटिस जारी कर सवाल पूछा  कि क्यों न आपके ऊपर पूरे प्रोजेक्ट का दस फीसदी का जुर्माना लगा दिया जाए। मामला जिला ग्रीवांस कमेटी में भी चल रहा है। कमेटी के चेयरमैन ने कई बार बिल्डर को बैठक में अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया, लेकिन फेरस का  ठग  बैठक में शामिल नहीं हुआ। 

इस  कमेटी के पूर्व चेयरमैन एवं पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर ने बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पुलिस को आदेश भी दिए थे। निवेशकों का आरोप है कि पुलिस ने न तो कोई कार्रवाई की है साथ ही पुलिस बिल्डर कंपनी को संरक्षण दे रही है। पुलिस बिल्डर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से बच रही है। एफआईआर दर्ज होने के बाद उसे गिरफ्तार नहीं कर रही है। निवेशकों का कहना है कि पुलिस ठगों और बेईमानों को पकड़ने के लिए होती है लेकिन यहाँ उलटा हो रहा है। पुलिस इस महाठग को संरक्षण दे रही है। उसे बचा रही है। निवेशकों का आरोप है कि फेरस के ठगों ने केस सम्बंधित पुलिस अधिकारीयों को करोड़ों का चढ़ावा चढ़ा चुके हैं। 

निवेशकों का कहना है कि 2014 में भाजपा की प्रदेश में सरकार बनी थे और उन्हें उम्मीद थी कि उन्हें इंसाफ मिलेगा लेकिन भाजपा सरकार भी ठगों की संरक्षक सरकार निकली। निवेशकों का कहना है कि इस बार भी प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी है और उन्हें उम्मीद नहीं है कि फेरस के ठग पकडे जाएंगे। निवेशकों का कहना है कि हो सकता है फेरस के ठग हरियाणा भाजपा सरकार के किसी बड़े नेता से मिले हों या ये भी हो सकता है कि ठगों ने पुलिस को खरीद लिया हो। 
निवेशकों का कहना है कि हमने आशियाने का बहुत बड़ा सपना देखा, अपने बच्चों और अपना तन पेट काटकर इस ठग के पास पैसा जमा करवाया ताकि हमारे बच्चे आलीशान मकान में रह सकें लेकिन ठगों ने हमारे सपनों की धज्जियां उड़ा दीं। हमारे पेट पर लात मारा और फरीदाबाद पुलिस ऐसे ठगों की संरक्षक बनी हुई है जो बेहद चिंताजनक है। 
निवेशकों का कहना है कि जल्द हम फरीदाबाद की सड़कों पर उतरेंगे और पुलिस, ठगों और सरकार के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन करेंगे। निवेशकों का कहना है कि पुलिस की कमी के कारण फेरस सिटी के बिल्डर सुरेंद्र सेठ और आशीष सेठ जो पिता पुत्र हैं इन्होने दिल्ली और फरीदाबाद वालों से हजारों करोड़ की ठगी की और दिल्ली और फरीदाबाद में इन पर दर्जनों मामले दर्ज हैं लेकिन पुलिस ने इन ठगों को आगे की ठगी के लिए खुला छोड़ रखा है ताकि ये देश के अन्य हिस्सों में भी ठगी करते रहे गरीबों के पेट पर लात मारते रहें। 

निवेशकों का कहना है कि फेरस के ठग पुलिस और सम्बंधित अधिकारियों की जेबें भरते रहें। उनका कहना है कि प्रदेश की खट्टर सरकार से हमें बहुत उम्मीदें थीं लेकिन खट्टर सरकार पूरी तरह से खटारा साबित हुई और अब हम इस सरकार को भ्रष्टों की सरकार मानते हैं। ये सरकार गरीबों के लिए नहीं है, फेरस के ठगों जैसे न जाने कितने महाठगों को संरक्षण देने वाली सरकार है। निवेशकों का कहना है कि हमें फरीदाबाद साइबर सेल पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीमों पर भरोषा है और हम चाहते हैं कि मामले की जांच क्राइम ब्रांच या साइबर सेल को सौंपी जाये लेकिन हमें उम्मीद नहीं है कि ऐसा होगा। 

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