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निजी स्कूलों में लूट - 20 की कॉपी स्कूल का नाम लिखने पर हो जाती है 60 रूपये की 

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फरीदाबाद-  शिक्षा निदेशक पंचकूला ने मार्च महीने के शुरू में ही सभी जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र भेजकर निर्देश दिया था कि प्राइवेट स्कूलों में नियमानुसार एनसीईआरटी की किताबें ही लगवाई जायें। जो स्कूल संचालक इसके विपरीत प्राइवेट प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों को मजबूर कर रहे हैं और अपने स्कूल के अंदर व अपनी बताई गई दुकान से ही किताब कॉपी स्टेशनरी वर्दी आदि खरीदने के लिए अभिभावकों को विवश कर रहे हैं उनके खिलाफ उचित कार्रवाई करते हुए उनके नाम शिक्षा निदेशालय को भेजे जाएं।

हरियाणा अभिभावक एकता मंच का आरोप है कि जहां अन्य जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों ने शिक्षा निदेशक के आदेशों की पालना में कार्रवाई शुरू कर दी है और स्कूलों में जाकर बच्चों के बस्ते का बजन नापा है और कौन सी किताबें बच्चों से खरीदवाई गई हैं इसकी जांच पड़ताल शुरू कर दी है वहीं फरीदाबाद के शिक्षा विभाग ने अभी तक स्कूलों की इस मनमानी को रोकने के लिए कोई भी कदम नहीं उठाया है। जबकि मंच की ओर से भी 28 मार्च को जिला शिक्षा अधिकारी व जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर स्कूलों की इस मनमानी की शिकायत की गई है। पत्र की कॉपी मुख्यमंत्री शिक्षा मंत्री अतिरिक्त मुख्य सचिव व शिक्षा निदेशक को भी भेजी गई थी।

मंच के प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा, प्रदेश संरक्षक सुभाष लांबा ने कहा है कि एक तो स्कूल प्रबंधकों ने बिना फार्म 6 जमा कराए  एक अप्रैल से शुरू हुए नए शिक्षा सत्र में स्कूल फीस में काफी बढ़ोतरी कर दी है। इससे अभिभावक खासे परेशान हैं अब स्कूल संचालकों द्वारा  एनसीईआरटी की किताबों की जगह प्राइवेट पब्लिशर्स की महंगी किताबों को खरीदवाने से उनकी परेशानी को और बढ़ा दिया है। मंच का कहना है कि जब पेपर एनसीईआरटी की किताबों के सिलेबस के आधार पर आता है तो फिर स्कूलों में प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें क्यों लगाई जा रही है। वैसे भी प्राइवेट प्रकाशकों की किताबों की कीमत एनसीईआरटी की किताबों से काफी ज्यादा है। एपीजे के अभिभावक रमन सूद,अवनीश जैन व डीएवी 14 के अभिभावक एडवोकेट आई डी शर्मा ने  बताया है कि जो कॉपी बाजार में ₹20 की मिल रही है स्कूल वाले उसके कवर पेज पर अपने स्कूल का नाम लिखकर उसे ₹60 में बेच रहे हैं। नए छात्र पुराने छात्रों से किताब लेकर पढ़ाई ना कर सकें इसके लिए पुरानी किताबों  के एक दो पाठ्यक्रम को बदल दिया गया है या आगे पीछे कर दिया है। 

अभिभावकों का कहना है कि स्कूल संचालक लूटने का हर प्रकार का हथकंडा अपना रहे हैं। हरियाणा अभिभावक एकता मंच ने जिला शिक्षा अधिकारी को जो पत्र लिखा है उसमें उनको जानकारी दी गई है कि स्कूल संचालक अपने स्कूल में नियमानुसार एनसीईआरटी की किताबें ना लगाकर कमीशन खाने के चक्कर में प्राइवेट प्रकाशकों की महंगी व मोटी किताबें लगा रहे हैं और अभिभावकों पर उन्हीं को अपने स्कूल के अंदर खुली दुकानों या बाहर अपनी बताई गई दुकानों से ही खरीदने का दबाव डाल रहे हैं। बाजार में जो कॉपी पंद्रह ₹20 में मिलती है उस पर अपने स्कूल का लेबल लगाकर उसे ₹60 में  खरीदवाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। जिन किताबों की कोई जरूरत नहीं है उन्हें भी खरीदने के लिए कहा जा रहा है। फालतू किताबें लगा कर बच्चों के मासूम कंधों पर बस्ते का बोझ बढ़ाया जा रहा है। जबकि केंद्र व राज्य सरकार ने सभी क्लासों के बच्चों के बस्ते का बजन निश्चित किया हुआ है। लेकिन अभी तक मंच के पत्र पर जिला शिक्षा अधिकारी नहीं कोई भी उचित कार्रवाई नहीं की है। मंच ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री अतिरिक्त मुख्य सचिव, शिक्षा निदेशक से की है। 

हरियाणा अभिभावक एकता मंच के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट ओपी शर्मा व ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन आईपा के जिला अध्यक्ष एडवोकेट बीएस विरदी ने कहा है

कि केंद्रीय शिक्षा विभाग की ओर से नर्सरी से लेकर कक्षा 12 तक के बच्चों के बस्ते का बजन तय कर दिया गया है उसके बावजूद कमीशन खाने के चक्कर में छात्रों के मासूम कंधों पर भारी बस्ते का बोझ लादा जा रहा है। ऐसा करके उनके स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। इस पर तुरंत रोक लगनी चाहिए। अभिभावकों ने कहा है कि   प्राइवेट प्रकाशकों की किताबों के साथ कॉपी व अन्य स्टेशनरी का सेट नर्सरी से पहली कक्षा तक के बच्चों को दो से तीन हजार रुपए, कक्षा दो से पांचवीं तक चार से पांच हजार रुपये, कक्षा नौवीं से 12वीं तक सात से 10 हजार रुपये का सेट दिया जा रहा है जबकि बाजार में एनसीईआरटी किताबों के साथ यही सेट 600 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक है। यह खुल्लम-खुल्ला लूट है।

हरियाणा अभिभावक एकता मंच के प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा ने अभिभावकों से कहा है कि वे नियम के मुताबिक सिर्फ एनसीईआरटी की किताबें ही खरीदें इसके अलावा कॉपी व स्टेशनरी जहां से भी सस्ती मिलती है वहीं से खरीदें। ऐसा करने पर अगर स्कूल प्रबंधक उन्हें परेशान करते हैं तो वे तुरंत जिला शिक्षा अधिकारी के पास  लिखित में शिकायत दर्ज करें और उसकी एक कॉपी मंच के जिला कार्यालय चेंबर नंबर 56 जिला अदालत फरीदाबाद में भी दें जिससे दोषी स्कूलों के खिलाफ उचित कार्रवाई कराई जा सके।

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