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हरियाणा BJP नेताओं में दहशत, भगवान मंत्री बनाओ या न बनाओ लेकिन कोठी नंबर- 79 न मिले 

House-Number-79-Chandigarh
हमें ख़बरें Email: psrajput75@gmail. WhatsApp: 9810788060 पर भेजें (Pushpendra Singh Rajput)

चंडीगढ़: सीएम और डिप्टी सीएम के शपथ ग्रहण के बाद अब हरियाणा के कई नेताओं की निगाह अगले शपथ ग्रहण पर टिकी है और तमाम नेताओं का ख्वाब है कि वो मंत्री पद की शपथ लें लेकिन सबके  खवाब शायद ही पूरे हों। ख्वाब के साथ कई नेताओं में एक खौफ भी है कि उन्हें अगर मंत्री पद मिले तो किसी भी हाल में उन्हें कोठी नंबर 79 न मिले। कई बड़े नेता मंदिर या अन्य पूजा स्थल पर मंत्रिपद मांगने तो जा रहे हैं साल में ये भी मन्नत मांग रहे हैं कि उन्हें कोठी नंबर 79 किसी भी सूरत में न मिले। 
हरियाणा अब तक के पाठकों को मालूम हो कि हरियाणा सरकार के मंत्रियों के लिए चंडीगढ़ में एक कोठी ऐसी है, जिसकी दहशत ने उन्हें परेशान कर रखा है। इस कोठी में आज तक जो भी मंत्री रहा, उसके बाद अगला चुनाव नहीं जीत पाया। हुड्डा सरकार में फूलचंद मुलाना ने कोठी का वास्तु दोष भी दूर करा लिया था, लेकिन इसके बावजूद मुलाना चुनाव नहीं जीत पाए। चंडीगढ़ के सेक्टर सात में स्थित इस कोठी का नंबर 79 है। भाजपा सरकार के  परिवहन एवं आवास मंत्री कृष्ण लाल पंवार को पिछली बार ये कोठी मिली थी वो भी इस बार चुनाव हार गए। कई नेताओं ने इस कोठी में जाने के पहले खूब पूजा पाठ करवाया। शिवलिंग भी स्थापित करवाया लेकिन अब तक किसी की बात नहीं बनी। 

एक जानकारी के मुताबिक वर्ष 1982 में यह आवास तत्कालीन विधानसभा उपाध्यक्ष कुलबीर सिंह को आवंटित किया गया था। वह अगली बार हुए चुनाव में हार गए. इसके बाद वर्ष 1987 में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय सुषमा स्वराज को यह आवास अलाट किया गया तो वे भी अगला चुनाव हार गईं। 

वर्ष 1991 में करतार देवी, 1996 में बहादुर सिंह, 1999 में प्रो. रामबिलास शर्मा, 2005 में फूलचंद मुलाना को यही आवास अलाट किया गया और ये सभी नेता आगामी चुनाव हार गए। 

वर्ष 2009 में चुनाव हारने के बाद पूर्व मंत्री फूलचंद मुलाना ने इस आवास में कई तरह के बदलाव करवाए. यहां तक की ग्रहदशा दूर करने के लिए उन्होंने यहां शिवलिंग तक स्थापित करवा दिया. इसके बावजूद वह राजनीति में हाशिए पर ही रहे और अब मनोहर सरकार में यह आवास कृष्णलाल पंवार को ये कोठी मिली थी  और इस बार वे भी चुनाव हार चुके हैं इसलिए अब हरियाणा का कोई नेता नहीं चाहता कि उसे ये कोठी मिले। 
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