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खाने खिलाने वाला आज खुद खाने का मोहताज..

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कुरूक्षेत्र राकेश शर्मा: जिंदगी की जंग को लड़ते लड़ते कोई हार जाता है तो कोई जीत जाता है लेकिन जीतने के लिए कड़ा सघ्ंार्ष ओर मेहनत की जरूरत होती है जहां एक मानुस के लिए दो हाथ, दो पैर , दो आंख की जरूरत होती है यदि किसी कारण वंश इनमें से एक चला जाए तो जिदगी की जंग को लडऩा मुशकिल ओर कठिन सा हो जाता जिसको कुरूक्षेत्र के लाला राम डेरे वाला वार्ड न 11 का सुनील कुमार लड़ रहा है। लड़ रहा है दो जून की रोटी के लिए के लिए ...
सुनील कुृमार भी आम लोगो की तरह अपने पैरो पर खड़ा होकर अपना व अपने परिवार का गुजारा करता था, खुशीयों के मौके पर शादी बयाह के कार्यक्रम में लोगों को तंदुर से गर्म गर्म रोटी परोसता था, लेकिन कभी महंगाई की मार तो क5ाी काम से कम मेहनतनामा मिलने के कारण उसने भी अपना काम करने की शुरूआत की ओर ई रिक्शा लेकर लोगो को एक स्थान से दुसरे स्थान पर ले जाने का काम करने लगा ओर इस कार्य के लिए उसकी सहायता कोपरेटिव  बैंक ने कि ओर एक लाख की रिक्शा उसको 2200 रूपये महीने की किस्तों मे दे दी । परिवार में खुशीयों का जैसे अंबार सा उमड़ गया हो लेकिन किसी को 1या पता था कि ये खुशीयां केवल 6 माह के लिए ही थी। एक दिन काम से घर पर लौटते हुए उसके पैर में कांच का टुकड़ा लगा ओर धीरे धीरे यही कांच का टुकड़ा उसके लिए नासुर बन गया। घाव बढ़ता गया ईलाज के लिए पैसे ना होने के कारण उसकी टांग को ही काटना पड़ा लेकिन वह हारा नही ओर जिदंगी की जंग को लड़ता रहा जोकि आज भी लड़ रहा है।

100 रूपये प्रतिदिन कमा कर चला रहा है अपना घर
सुनील अपनी एक टांग गवाने के बाद भी हिमत नही हारा परिवार में दो लड़कियां है, पत्नी है जिनके लालन पालन की जिमेवारी उसके कंधो पर जिससे वह किनारा नही कर सकता ओर पैसो के अभाव ओर घर का गुजारा चलाने के लिए उसके ई रि1शा किराये पर लिये जिसका प्रतिदिन 250 रूपये वह किराया देता है ओर बताता है हर रोज वह 350 रूपये के कमा लेता है किराया देकर उसको मात्र 100 रूपये ही बचते है। सरकार की योजनाओं से वचिंत सुनील के पास गरीबी को दर्शाने वाला राशन कार्ड भी नही ओर ना प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना का वह पहचान पत्र जिससे वह अपना ईलाज बिना पैसे के करवा सके।
बैंक का कर्ज बन गया बोझ
सुनील कुमार ने जो रिक्शा बैंक से ली उसके किस्म चुकाने वह असमर्थ हो चुका है ६ माह तक तो उसने मेहनत करके बैंक की किस्त लौटाई लेकिन एक टांग को गवाने के बाद उसको ना लौटा पाया ओर आज बैंक को 96000 हजार का कर्ज उसके कंधो पर जिसको लौटाने के लिए वह प्रयासरत तो लेकिन समार्थक नही। सुनील कुमार ने बताया कि ई रिक्शा की बैटरी चार्जिग की वजह से खराब हो गई जिन पर लगभग 30हजार से 40 हजार रूपये की लागत आयेगी।

समाजसेवीयों नेे बढाया हाथ
इसी दौरान समाजसेवी दीपक चीब ओर राजेश वधवा ने सुनील कुमार की मदद के लिए हाथ बढ़ाया ओर खराब पड़ी हुई बैटरी के लिए मदद का भरोसा दिलाया उन्होने अपील भी कि वह भी सुनील कुमार की मदद के लिए आगे आये।
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