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SPS- भैंस के आगे बीन बजाओ, भैंस खड़ी पगुराय, फिर भ्रष्टों के घेरे में खट्टर सरकार 

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चंडीगढ़: भाजपा-जजपा सरकार में 10 नए मंत्रियों को शामिल किया गया। सभी मंत्रियों ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली और शाम तक मंत्रियों को उनके विभाग भी सौंप दिए गए। जल्द ये मंत्री अपना कामकाज देखने लगेंगे। चंडीगढ़ में आज इन मंत्रियों के तमाम कार्यकर्त्ता पहुंचे साथ में कई माफिया और प्रदेश के दो नंबर भी कई मंत्रियों को माला पहनाने पहुंचे। दो नम्बरियों को पता है कि इन मंत्रियों का सिर पर हाथ रहेगा तो उनका दो नंबर का धंधा और फले फूलेगा। और हरियाणा को अच्छी तरह से लूट सकेंगे। गरीबों का राशन डकार सकेंगे। पहले तीन महीने बाद देते थे अब इन मंत्रियों की कृपा मिली तो 6 महीने बाद गरीबों को राशन देंगे और सीधा पांच महीने का राशन ब्लैक में बेंच लेंगे। 

खट्टर-1 में इसी वजह से भ्रष्टाचार पहले से ज्यादा बढ़ा और पिछले कार्यकाल में कई बड़े मंत्रियों को जनता ने धूल चटा दिया। सिर्फ दो मंत्री ही चुनाव जीत सके। जब कोई नेता मंत्री बनाया जाता है तो उस पर पूरे प्रदेश की जनता की जिम्मेदारी होती है। हरियाणा के लगभग ढाई करोड़ लोगों को अपने मंत्रियों से बहुत सारी अपेक्षाएं होती हैं लेकिन अधिकतर देखा गया है कि प्रदेश के मंत्री बनते ही कई नेता खुश को शहंशाह समझने लगते हैं। जनता को मूर्ख समझते हैं। अपना घर भरना प्राथमिकता समझते हैं। जनता से ढंग से बात तक नहीं करते हैं। 

किसी को शिक्षा की जिम्मेदारी मिलती है तो किसी को स्वास्थ्य की तो कोई सड़क और बिजली मंत्री बनाया जाता है लेकिन ये मंत्री अपने विधानसभा क्षेत्र की जनता की समस्याएं तक दूर नहीं कर पाते हैं। प्रदेश तो बहुत बड़ा है। ये मंत्री अगर अपने विधानसभा क्षेत्र की जनता को को खुश नहीं कर पाते तो हरियाणा की ढाई करोड़ जनता को तो शायद आजीवन मंत्री रहें तब भी न खुश कर सकें। यही कारण है कि हरियाणा के अधिकतर मंत्री अगली बार विधायक भी नहीं बन पाते हैं। खट्टर के पहले कार्यकाल ही नहीं इसके पहले कांग्रेस और इनेलो सरकारों के मंत्री भी ऐसे ही थे वरना चंडीगढ़ की कोठी नंबर-79 में रिकार्ड न बनता।
केंद्र में मोदी सरकार दुबारा आई और पहले से भाजपा को अधिक सीटें मिलीं जबकि हरियाणा में भाजपा को पहले से 7 सीटें कम मिलीं। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के अधिकतर मंत्री दुबारा चुनाव जीते जबकि खट्टर सरकार के अधिकतर मंत्री दुबारा चुनाव हार गए। ऐसा क्यू हुआ? हरियाणा अब तक अपने सूत्रों की बात करे तो केंद्र में मोदी-शाह की जोड़ी अपने मंत्रियों पर निगाह रखती है और उनके कामकाज पर निगाह रखती है जबकि हरियाणा के खट्टर मनमोहन सिंह की तरह काम करते देखे गए। मतलब पहले कार्यकाल में वो  एक कमजोर मुख्य्मंत्री साबित हुए। मंत्री अपनी मनमानी करते रहे, अधिकारी अपनी मनमानी करते रहे। खट्टर कहते रहे कि न खाऊंगा न खाने दूंगा लेकिन 500 लेने वाले 2000 लेने लगे। 

चालाक अधिकारी अख़बारों में प्रेस नोट भेज सरकार का गुणगान करते रहे और कुछ सिपाही या तहसील के कर्मचारियों को हजार-पांच सौ की रिश्वत लेते पकड़ खट्टर को दिखाते रहे कि प्रदेश में भ्रष्टाचार ख़त्म हो रहा है। अब रिश्वतखोरी नहीं चलती। ये देख खट्टर खुश होते रहे और अपने अधिकारियों की पीठ थपथपाते रहे। खट्टर ये नहीं समझ सके कि ये सब दिखावा हो रहा है। उन्हें एक तरह से उल्लू बनाया जा रहा है। 
सीएम अपने हिसाब से अच्छा काम करते रहे। प्रदेश की सभी विधानसभा क्षेत्रों में सौ-दो सौ करोड़ से लेकर पांच हजार-दस हजार करोड़ रूपये विकास के लिए दिए लेकिन भ्रष्ट अधिकारी इनमे से तमाम पैसों को को डकार गए। पैसे डकारने में खट्टर के कुछ मंत्रियों ने भी अधिकारियों का साथ दिया। 

सीएम ने प्रदेश के विकास के लिए जो पैसे बांटे वो उन्होंने अपने घर से नहीं बांटा। हरियाणा अब तक को जहाँ तक जानकारी है उसके मुताबिक हरियाणा पर मौजूदा समय में  लगभग एक लाख 70  हजार करोड़ रुपये रुपये का कर्ज है। हरियाणा में प्रति व्यक्ति पर 60 हजार रुपये से ज्यादा का कर्ज है। वर्ष 2014 में हरियाणा पर कर्ज करीब 60 हजार करोड़ रुपये था, जो 5  साल में ही बढ़कर दोगुने से ज्यादा हो गया है।
हरियाणा अब तक के पास आज एक परेशान व्यक्ति आया जिसने कहा कि उसकी पत्नी किसी के साथ भाग गई है और पुलिस उसकी पत्नी को ढूंढकर लाना चाहती है लेकिन इसके लिए कम से कम 20 से 25 हजार का खर्च आएगा। पुलिस के लिए वाहन का इंतजाम करना पड़ेगा और उसकी पत्नी अयोध्या के पास गई है इसलिए जब पुलिस वहां जाएगी तो होटल और अन्य खर्चे भी देने पड़ेंगे। उस व्यक्ति का कहना था कि हमारे पास एक भी रूपये नहीं हैं। उस व्यक्ति और उसके पिता ने लोगों से हाथ जोड़ मदद की अपील की लेकिन अगर उसी समय हम उसे बता देते है आप और अपने पिता जी पर कुल मिलकर १ लाख 20 हजार का कर्ज भी है तो शायद उसके होश उड़ जाते। जबकि ये सत्य है। हरियाणा का प्रत्येक व्यक्ति पर लगभग 60 हजार का कर्ज है। 
आज जिन नेताओं को मंत्री बनाया गया उन्हें नई चमचमाती गाड़ी दी गई। कल तक उन्हें चंडीगढ़ में बांग्ला भी मिल जाएगा। कई-कई सुरक्षाकर्मी मिल जायेंगे। इन सब पर भी पैसे खर्च होंगे और इन सबके लिए भी सरकार को कर्जा लेना पड़ेगा। इन नेताओं को कई तरह की अन्य सुविधाएँ भी मिलेंगी। 

आखिर सरकार कर्ज क्यू लेती है। क्या सरकार की कमाई नहीं है? क्या हरियाणा के लोग टैक्स नहीं देते हैं? क्यू कर्जदार होती जा रही है सरकार इसके जबाब में जहाँ तक हरियाणा अब तक का जबाब है वो है भ्रष्टाचार,,
प्रदेश का हर व्यक्ति टैक्स दे रहा है। अगर कोई बच्चा आज पैदा होता है और उसके परिजन उसके लिए दूध या अन्य जरूरत का सामान खरीदने जाते हैं तो उस सामान पर भी टैक्स लगता है। प्रदेश के छोटे-बड़े उद्योगपति पूरा टैक्स दे रहे हैं लेकिन सरकार पर कर्ज बढ़ता जा रहा है। सरकार जनता को अच्छी सड़क और शिक्षा-स्वास्थ्य की सुविधाएँ नहीं दे पा रही है। प्रदेश की अधिकतर जनता पानी खरीदकर पी रही है। सरकारी पानी जहरीला हो चुका है। सरकारी नलों का पानी अब पीने योग्य नहीं रहा। बिजली की बात करें तो दोस्त कल आप बिजली को हाथ में लेकर एक नजर उसपर दौड़ाना, यूनिट रेट के  अलांवा न जाने कितने तरह के टैक्स आपको देखने को मिलेंगे। 
शिक्षा की बात करें तो अगर आपके बच्चे तय समय से एक दिन निजी स्कूलों में फीस जमा करने लेट हो गए तो आपके बच्चे को ऐसी धमकी मिलेगी जैसे कई दशक पहले चम्बल के बीहड़ों के डाकुओं के धमकी मिलती थी। माल दो वरना?
स्वास्थ्य की बात करें तो किसी दुर्घटना में घायल व्यक्ति अगर किसी निजी अस्पताल में पहुँचता है और ऐसे मौकों पर घायल व्यक्ति के परिजन उसके साथ नहीं होते हैं, जब दुर्घटना होती है तो कोई अच्छा इंसान घायल को अस्पताल लेकर पहुँचता है लेकिन उधर खून बहता रहता है इधर अस्पताल के डाक्टर पैसे जमा करवाने की बात करते रहते हैं और ऐसे में तमाम घायल दम तोड़ देते हैं क्यू कि जो व्यक्ति किसी घायल को अस्पताल ले जाता है वो इंसानियत के नाते ले जाता है लेकिन जब उससे लाख-पचास हजार जमा करवाने की बात की जाती है तो चुपचाप बाहर निकल जाता है। डाक्टर भी माल लिए बिना इलाज नहीं करते इसलिए घायल दम तोड़ देता है। 
हरियाणा से अच्छा तो दिल्ली है जहाँ किसी घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले को इनाम मिलता है और निजी अस्पताल में भी कोई घायल पहुँच जाता है तो दिल्ली सरकार पूरा बिल देती है। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में हरियाणा कई प्रदेशों में सबसे निचले प्रदेशों में गिना जाता है और शिक्षा के क्षेत्र में भी यही हाल है। 
इस प्रदेश में अगर कोई विधायक बन गया तो अपने पांच साल के कार्यकाल में एक-एक सड़क को दो बार बनवाता है क्यू कि सड़कें बनते ही टूटने लगतीं हैं और ढाई साल नहीं चल पातीं। करोड़ों का घपला नेता और अधिकारी मिलकर करते हैं। सड़कों पर घटिया मैटेरियल लगवाते हैं। 
हरियाणा में हर साल अरबों रूपये नाले-नालियों में लगते हैं लेकिन अधिकतर जगहों पर पीली ईंटों से नाले नालियां बनते हैं। सीमेंट भी घटिया होती है। बड़ा घोटाला हो रहा है। 

प्रदेश में खट्टर-1 के समय जमकर लूट हुई इसलिए प्रदेश पर कर्ज बढ़ा। खैर जनता ने लुटेरों को इस बार सबक सिखा दिया। कइयों से विधायक का पद भी छिन गया।  कमजोर होने के कारण पांच साल खट्टर पर बेईमान अधिकारी हावी रहे। अब खट्टर-2 शुरू हो गया है। इस बार दुष्यंत चौटाला भी खट्टर के साथ हैं जिनके पिता और दादा भ्रष्टाचार के मामले में जेल की सजा काट रहे हैं। अब देखना है कि खट्टर-2 का कार्यकल कैसे रहता है। 
दोस्तों हरियाणा अब तक के पास पूरे प्रदेश के लोग फोन कर अपनी समस्या बताते हैं। हाल में जब हमने राशन घोटाले का मामला उठाया तो हरियाणा के तमाम जिलों से फोन आया कि हमारे जिले में भी ऐसा ही हो रहा है। हम खबर ही लिख सकते हैं, एक पुरानी कहावत है कि भैंस के आएगी बीन बजाओ, भैंस खड़ी पगुराय, हमने अब लग रहा है कि हरियाणा के भ्रष्ट खट्टर पर हावी हैं इसलिए आगे भी भ्रष्ट हरियाणा को लूटते रहेंगे और प्रदेश पर कर्ज बढ़ता रहेगा और आज मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट की गईं तस्वीरों में हमने देखा कि प्रदेश के तमाम भ्रष्ट चंडीगढ़ पहुँच गए। 

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