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खेतों में पराली जलाने पर पलवल के किसानों पर ठोंका गया जुर्माना 

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पलवल, 9 अक्टूबर। उपायुक्त नरेश नरवाल ने बताया कि जिले में फसल अवशेष या पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से प्रयासरत है। इसके लिए गांवों में विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को समय-समय पर खेतों का निरीक्षण करने के आदेश जारी किए गए हैं।

उपायुक्त ने बताया कि जिले में जहां भी पराली जलाने की घटना होती है, उसकी सूचना तुरंत सेटेलाइट के माध्यम से जिला प्रशासन को प्राप्त हो जाती है। इसके बाद संबंधित विभागों के अधिकारियों द्वारा जरूरी कार्यवाही अमल में लाई जाती है। अभी तक जिले में 9 किसानों को उनके खेतों में फसल अवशेष या पराली जलाने की घटना मिलने पर चालान किया गया है, जिसमें होडल ब्लॉक के गांव बांसवा के पूरन, पलवल ब्लॉक के गांव मांदकोल के जयदेव, जनौली के कल्लू, असावटा के बीर सिंह, सूरज व मोहनलाल तथा हथीन ब्लॉक के गांव कोंडल के किशनलाल तेवतिया को 2500-2500 रुपए और हसनपुर ब्लॉक के गांव कुशक के ओमान व किशन को 15-15 हजार रुपए का चालान किया गया। उपायुक्त ने बताया कि जो भी किसान खेतों में आगजनी की घननाओं को अंजाम देगा, उसके खिलाफ निरंतर जुर्माना व जरूरी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।

उपायुक्त ने कहा कि किसानों को स्वयं भी जागरूक बनना चाहिए तथा आगजनी की घटनाओं से होने वाले नुकसान व इसके दुष्प्रभाव को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों के अधिकारी व कर्मचारी सभी गांवों में किसानों को फसल अवशेष न जलाने बारे जागरूक कर रहे हैं। सरकार व राष्टï्रीय हरित अभिकरण के आदेशानुसार फसल अवशेष या पराली जलाने के दोषी व्यक्ति के विरूद्ध कानूनी कार्यवाही का प्रावधान है, जिसके तहत दो एकड़ से कम भूमि के किसान पर 2 हजार 500 रुपए प्रति घटना तथा 2 से 5 एकड़ तक के कृषक पर 5 हजार रुपए प्रति घटना और 5 एकड़ से अधिक भूमि वाले किसान पर 15 हजार रुपए प्रति घटना के हिसाब से पर्यावरण मुआवजा का जुर्माना लगाने का प्रावधान है। जिला में इसके लिए कृषि विभाग के अधिकारियों को इसके लिए उचित कार्यवाही करने बारे अधिकृत किया गया है। उन्होंने बताया कि जिन गांवों के किसानों को जुर्माना लगाया गया है, उस गांवों के नंबरदारों व सरपंचों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है, क्योंकि इन्होंने समय पर जिला प्रशासन को सूचित नहीं किया। जबकि उपायुक्त की ओर से 7 अक्टूबर को सभी गांवों के सरपंचों को अर्ध सरकारी पत्र के माध्यम से उनके गांवों में पराली जलाने की घटना रोकने व किसानों को जागरूक करने और यदि कोई पराली जलाने की घटना उनके गांवों में होती है, तो इसकी सूचना तुरंत जिला प्रशासन को देने के निर्देश दिये गये थे। पत्र में स्पष्टï बताया गया था कि अगर इसमें कोई कोताही करता पाया गया तो उस गांव के सरपंच व नंबरदार के विरुद्ध आवश्यक कार्यवाही अमल मे लाई जाएगी। इसके अलावा उपायुक्त नरेश नरवाल ने यह भी बताया कि जिस ग्राम पंचायत का कार्य सराहनीय रहेगा, उसे गणतंत्र दिवस या स्वतंत्रता दिवस पर सम्मानित भी किया जायेगा।

उन्होंने जिले के सभी किसानों से पुन: अपील की है कि वह फसलों के अवशेषों को खेतों में ना जलाएं और कृषि यंत्रों के माध्यम से फसल अवशेष का उचित प्रबंधन करें। इसके लिए कस्टमर हायरिंग सेंटर, ग्राम पंचायतों व किसानों के पास उपलब्ध कृषि यंत्रों को किराये पर लेकर फसल अवशेषों का प्रबंधन करें। फसल अवशेष जलाने से वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ता है, जो जनजीवन के स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक खासकर कोविड महामारी के दौरान इसका स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ेगा।

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