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Palwal: रात भर चला जमातियों को ढूंढने का आपरेशन, मजबूत इंफोर्मेशन नेटवर्क रहा कारगर

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पलवल, 14 अप्रैल। हरियाणा में फरीदाबाद, गुरूग्राम, नूंह के बाद पलवल ऐसा जिला है जहां पर कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या दहाई अंकों में हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मंगलवार को जारी किए बुलेटिन में पलवल के पोजीटिव केस की संख्या 29 (एक डिस्चार्ज) बताई गई। इतनी संख्या के बावजूद जिला प्रशासन ने कोरोना से निपटने के लिए जिस तैयारी व सक्रियता से काम किया उससे कम्यूनिटी संक्रमण के मामले पर लगाम लगी। पलवल में जिलावासियों को कोरोना से बचाने के लिए जिला प्रशासन का मजबूत सुरक्षा चक्र अब तक भरोसेमंद साबित हुआ है।

पलवल शहर से आए पहले केस से ही एक्टिव रहा स्वास्थ्य विभाग
सिविल सर्जन डा. ब्रह्मदीप सिंह ने बताया कि जिला से भेजे गए सेंपल्स में पहली पोजीटिव रिपोर्ट 22 मार्च को आई। पहला पोजीटिव केस मिलते ही स्वास्थ्य विभाग ने पलवल शहर के उस एरिया के 22 घरों को क्वारंटीन पर लिया जहां से पहला केस सामने आया। क्वारंटीन किए गए घरों में स्वास्थ्य विभाग व नगर परिषद के बचाव संबंधी उपाय निरंतर जारी रहें प्रशासन की निगरानी के चलते पूरा एरिया संक्रमण से बचा रहा। दुबई की ट्रैवल हिस्ट्री वाले पहले केस में मरीज रिकवर होकर घर भी पहुंच चुका है। हालांकि पलवल के अधिकतर केस एक स्पेसिफिक एरिया से सामने आए है लेकिन स्वास्थ्य विभाग के 400 लोगों की टीम दिन-रात मजबूती से काम कर रही है। कंटेनमेंट जोन में शामिल गांवों में 70 हजार लोगों तक स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंच चुकी है। जिनकी स्कैनिंग व स्क्रीनिंग लगातार की जा रही है और सबसे पहले कंटेनमेंट प्लान पर काम शुरू करते हुए सैंपलिंग को लगातार जारी रखा। जिला के सुरक्षा चक्र को मजबूत बनाए रखने के लिए अब 17 नई मोबाइल टीमों को एक्टिव कर दिया गया है ताकि हर घर तक स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराई जा सके।

हथीन में खुद जांच के लिए आगे आए इमाम
पलवल जिला के हथीन सब डिविजन में सबसे अधिक कोरोना के केस पोजीटिव आए है। सबडिविजन के 51 गांव कंटेनमेंट व बफर जोन में शामिल है। गांव-गांव जमात से आए लोग व उनके संपर्क में आने वाले लोगों को ढूंढ-ढूंढ कर स्वास्थ्य जांच कराई जा रही है। इसी कड़ी में एक दिन पहले एसडीएम हथीन वकील अहमद ने अलग-अलग मस्जिदों के 16 इमामों को जांच के लिए भिजवाया। खास बात यह रही है प्रशासन की सक्रियता से ये इमाम खुद चल कर स्वेच्छा से जांच के लिए आगे आए है। जहां एक समय पहले तक लोगों को सूचना तंत्र के आधार पर लाया जाता था वहीं अब लोग खुद जांच के लिए आगे आने लगे हैं।
    
रात भर चला जमातियों को ढूंढने का आपरेशन, मजबूत इंफोर्मेशन नेटवर्क रहा कारगर
जिला प्रशासन में स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ पलवल जिला में पुलिस के एक्टिव नेटवर्क का भी बड़ा मजबूत रोल रहा है। पुलिस अधीक्षक दीपक गहलावत स्वयं भी इस दौरान 18-18 घण्टे काम कर रहे हैं। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि निजामुद्दीन मरकज के बाद पुलिस को पलवल जिला में जमाती होने की सूचना मिली। जिसके चलते 30 मार्च को 12 जिनमें 10 बांग्लादेश के निवासी को जांच के लिए लाया गया। उसके बाद दिल्ली से विभिन्न एंजेंसियों के मिले इनपुट के बाद लोकल नेटवर्क के जरिए आठ गांवों में जमातियों की बड़ी संख्या होने की जानकारी मिली। पहली अप्रैल को सांय छ: बजे जिला की पुलिस टीम को एक्टिव कर दिया और रात तीन बजे तक सात गांवों से जमाती ढूंढ कर निकाले गए और उन्हें क्वारंटीन सेंटर लाया गया। पुलिस और हेल्थ डिपार्टमेंट के ज्वाइंट आपरेशन में गुराकसर में रात को जमाती नहीं मिले लेकिन तीन बजे के बाद सारा फोकस उसी गांव पर कर दिया और अगली सुबह जमातियों को ढूंढ निकाला गया। जब इन जमातियों की टेस्ट रिपोर्ट आई तो गुराकसर से ही सात केस पोजीटिव मिले। अब भी लगातार पुलिस का नेटवर्क सक्रिय है जिसके चलते हर गांव से सूचना मिलते ही तुरंत लोगों को टेस्ट के लिए लाया जा रहा है।

सबसे पहले नियुक्त किए मजिस्ट्रेट और लॉकडाउन में नहीं की देरी
हरियाणा सरकार से कोरोना को लेकर मिले पहले निर्देशों से ही पलवल में जिला प्रशासन ने थानावार ड्य्टी मजिस्ट्रेट नियुक्त कर दिए गए है। साथ ही लॉकडाउन के लिए भी सरकार से विशेष अनुमित प्राप्त कर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई। उपायुक्त नरेश नरवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि ड्यूटी मजिस्ट्रेट के साथ-साथ सुपरवाइजिंग अधिकारी भी नियुक्त किए गए। उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस से जिलावासियों के बचाव के लिए प्रशासन के अंग सभी विभागों ने आपसी कोआर्डिनेशन व टीम वर्क से काम किया। पंचायतों को इस कदर एक्टिव बनाया गया कि मीरका गांव में रात को छिप कर दाखिल हुए व्यक्ति को सुबह ही पंचायत के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग के पास भेजा गया। पंचायतों से लगातार मिल रहे इनपुट के आधार पर तुरंत एक्शन हो रहा है। साथ ही लाकडाउन के दौरान जिलावासियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो इसके लिए आवश्यक वस्तुओं की कमी न हो इस पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है। कंटेनमेंट जोन में शामिल गांवों में डोर स्टेप डिलीवरी की गई। जरुरतमंदों के लिए शैल्टर होम खोले गए और स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से जरूरतमंदों को भोजन व राशन उपलब्ध कराने का कार्य भी लगातार जारी है।
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