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SPS: हरियाणा के सभी मंत्रियों ने कोठी नंबर-79 लेने से मना किया-गब्बर भी नहीं लेंगे 

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चंडीगढ़: हरियाणा अब तक ने अपने पाठकों को कई दिनों पहले बताया था कि प्रदेश के तमाम नेता मन्नतें मांग रहे हैं कि वो अगर मंत्री बनें तो उन्हें कोठी नंबर 79 न मिले। अब प्रदेश में वही देखा जा रहा है। सूत्रों द्वारा जानकारी मिल रही है कि प्रदेश के तमाम मंत्रियों ने चंडीगढ़ के सेक्टर स्थित कोठी नंबर-79 लेने से साफ़ मना कर दिया है। गृह मंत्री अनिल विज उर्फ़ गब्बर इस बार भी अम्बाला से अपना कामकाज देखेंगे। उन्होंने पिछली बार में चंडीगढ़ में कोई कार्यालय नहीं लिया था।  गृह मंत्री विज का कहना है कि  वह कई सालों से सुबह रोजाना अंबाला कैंट के सदर बाजार चौक पर आमजन के साथ बैठकर चाय पीते हैं और शहर की समस्याओं पर चर्चा करते हैं। वे सालों से चली आ रही अपनी इस परंपरा को भी नहीं तोड़ सकते और सरकार मकान की उन्हें कोई खास आवश्यकता भी नहीं है। इसलिए वह जहां अभी रह रहे हैं, वहीं ठीक हैं।

हरियाणा अब तक को मिली जानकारी के मुताबिक केबिनेट मंत्री मूलचंद शर्मा को अब चंडीगढ़ सेक्टर सात में कोठी नंबर 75, मंत्री रणजीत सिंह को सेक्टर तीन में कोठी नंबर 32, मंत्री ओमप्रकाश यादव को कोठी नंबर 68, मंत्री कमलेश ढांडा को कोठी नंबर 73, मंत्री अनुप धानक को कोठी नंबर 76, मंत्री संदीप सिंह को कोठी नंबर 72 व मंत्री जय प्रकाश दलाल को सेक्टर 16 में केाठी नंबर 239 अलॉट कर दी गई है। कोठी नंबर 79 के लिए कई मंत्रियों से बात की गई लेकिन सब्नसे इसे लेने से मना कर दिया। 
इस कोठी को लेकर ऐसा अंधविश्वास हावी है कि इस कोठी में जो मंत्री रहता है, वह हार जाता है। सूत्र बताते हैं कि इसलिए इस कोठी में रहने के लिए कोई मंत्री रुचि नहीं दिखाता। कुछ नेता इस भूत प्रेत वाली कोठी बताते हैं। कई बार भूत भागने के लिए यहाँ पूजा पाठ भी हो चुका है। हमने आपको इससे पहले बताया था कि हुड्डा सरकार में फूलचंद मुलाना ने कोठी का वास्तु दोष भी दूर करा लिया था, लेकिन इसके बावजूद मुलाना चुनाव नहीं जीत पाए। चंडीगढ़ के सेक्टर सात में स्थित इस कोठी का नंबर 79 है। भाजपा सरकार के  परिवहन एवं आवास मंत्री कृष्ण लाल पंवार को पिछली बार ये कोठी मिली थी वो भी इस बार चुनाव हार गए। कई नेताओं ने इस कोठी में जाने के पहले खूब पूजा पाठ करवाया। शिवलिंग भी स्थापित करवाया लेकिन अब तक किसी की बात नहीं बनी। 

एक जानकारी के मुताबिक वर्ष 1982 में यह आवास तत्कालीन विधानसभा उपाध्यक्ष कुलबीर सिंह को आवंटित किया गया था। वह अगली बार हुए चुनाव में हार गए. इसके बाद वर्ष 1987 में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय सुषमा स्वराज को यह आवास अलाट किया गया तो वे भी अगला चुनाव हार गईं। 

वर्ष 1991 में करतार देवी, 1996 में बहादुर सिंह, 1999 में प्रो. रामबिलास शर्मा, 2005 में फूलचंद मुलाना को यही आवास अलाट किया गया और ये सभी नेता आगामी चुनाव हार गए। 

वर्ष 2009 में चुनाव हारने के बाद पूर्व मंत्री फूलचंद मुलाना ने इस आवास में कई तरह के बदलाव करवाए. यहां तक की ग्रहदशा दूर करने के लिए उन्होंने यहां शिवलिंग तक स्थापित करवा दिया. इसके बावजूद वह राजनीति में हाशिए पर ही रहे और अब मनोहर सरकार में यह आवास कृष्णलाल पंवार को ये कोठी मिली थी और वो भी इस बार चुनाव हार गए। यही कारण है कि सभी मंत्रियों ने ये कोठी लेने से मना कर दिया है। 
मंत्री बनाये जाने के बाद हरियाणा के कई नेता गब्बर जैसी बातें कर रहे है लेकिन न जाने भूत से क्यू डर रहे हैं। अंधविश्वास ऐसे नेताओं पर क्यू हावी है। 
अंधविश्वास और भूत के बारे में बात करें तो कल मैंने हरियाणा अब तक के पाठकों से कहा था कि मैं भूतों के बारे में कुछ जानकारी दूंगा। आपको बता दें कि  हरियाणा आने के पहले मैं उत्तर प्रदेश में रहता था। स्कूल के समय की बात है जब मैं 1988 में दसवीं कक्षा का छात्र था। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में स्थित गांव में रहता था। गांव से लगभग आधा किलोमीटर आम का एक बगीचा था जहाँ आम के सैकड़ों पेड़ थे। जून जुलाई में आम के पेड़ों में जब आम पकते थे तब एक महीने तक पूरी बाग़ पीली दिखाई पड़ती थी। बाग़ का एक भी आम न कोई तोड़ता था न खाता था। उस बगीचे को भुतही बगिया कहा जाता था और दशकों से उस बाग़ के आम पककर सड़ जाते थे लेकिन कोई एक भी आम उस तरह नहीं खाना चाहता था जैसे अब चंडीगढ़ की सेक्टर 7 की कोठी नंबर-79 में कोई मंत्री रहना नहीं चाहता है। हमारे गांव के बड़े बुजुर्ग अपने बच्चों से यहाँ तक कहते थे कि भुतही बगिया की तरफ देखना भी मत वरना भूत आँखें ख़राब कर देगा। 

बाग़ में बड़े-बड़े आम के पेड़ और पीले आम देख मैं ज्यादा समय तक रह नहीं सका एक और एक दिन मैं उस बाग़ में घुस गया और पेड़ के नीचे तमाम पके आमों में से कुछ आम उठा मैंने वाहन चूस लिया। घर ले जाना उचित नहीं समझा वरना घर के लोग डर जाते। आम चूस मैं बाग़ से बाहर निकल आया और लगभग एक हफ्ते तक इंतजार करता रहा कि भूत मेरा क्या करेगा लेकिन हुआ कुछ नहीं इसलिए एक हफ्ते बाद रोज उस बाग़ में जाकर आम खाने लगा। कुछ दोस्तों को बताया तो कंपकंपाते वो भी हमारे साथ बाग़ के अंदर गए और डरते-डरते वो भी आम का जायका लेने लगे। 
ये सिलसिला तीन हफ्ते तक चला और किसी को कुछ नहीं हुआ। ये बातें धीरे-धीरे पूरे गांव के लोगों को पता चल गईं और पूरा गांव धीरे-धीरे उस बाग़ का आम खाने लगा और आज 16 नवम्बर 2019 तक वो भुतही बगिया किसी का कुछ नहीं बिगाड़ सकी है। उसके बाद मैं हमेशा उस जगह जाने लगा जहाँ लोग भूतों की बात करते थे। कुछ लोग भूत भगाने के लिए सड़क पर नारियल फेंक देते थे और मैं उसे तोड़कर खा जाता था। 10वीं के बाद मैंने विज्ञान लिया और 12 में भी विज्ञानं और उसके बाद मैंने पंडित मुनेश्वर दत्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय में भी विज्ञान ही लिया। तमाम ऐसी जानकारियां हासिल हुईं जिनके बाद मैं कभी भूत प्रेत पर विश्वाश नहीं करता। हरियाणा के मंत्रियों में दहशत पर हंसी आ रही है। ये मंत्री बनने के बाद घमंडी हो जाते हैं ,कामकाज नहीं करते हैं इसलिए हार जाते हैं। कहते है कोठी नंबर 79 में रहने के कारण हार गए। 

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