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नई शिक्षा नीति को सबसे पहले लागू करेगा हरियाणा- शिक्षा मंत्री 

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चंडीगढ़, - हरियाणा के शिक्षा मंत्री  कंवर पाल ने आज राष्ट्रपति  रामनाथ कोविंद तथा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की विधिवत रूप से वीडियो कान्फ्रैंसिंग के माध्यम से शुरुआत करने की पहल का स्वागत किया है ।

        उन्होंने कहा कि हरियाणा नई शिक्षा नीति को लागू करने वाला देश का पहला राज्य होगा। संयोग से आज के दिन ही हरियाणा में उच्चतर शिक्षा विभाग द्वारा स्नातक प्रथम वर्ष के ऑनलाइन दाखिले की प्रक्रिया की शुरूआत की गई है, जो इस नीति का एक मुख्य पहलु है । वर्ष 2030 तक उच्चतर शिक्षा में ग्रॉस इनरोलमेंट रेश्यो (जीईआर) 50 प्रतिशत तक करना है, जो वर्तमान में देश में 26, जबकि हरियाणा में पहले ही यह 32 प्रतिशत तक है।

        शिक्षा मंत्री  हरियाणा राजभवन से राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य के साथ वीडियो कान्फ्रैंसिंग के माध्यम से केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा दिल्ली से आयोजित राष्टï्रीय शिक्षा नीति 2020 में उच्चतर शिक्षा में बदलाव शीर्षक के इस कार्यक्रम में जुड़े । इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल द्वारा वीडियो कान्फ्रैंसिंग के माध्यम से स्नातक प्रथम वर्ष में दाखिले के लिए दाखिला पोर्टल http://dheadmission.nic.in का शुभारम्भ भी किया।

        उन्होंने कहा कि हरियाणा नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए पहले ही चंडीगढ़ में शिक्षाविदों की चार दिवसीय डिजिटल कॉन्कलेव का आयोजन कर चुका है। इसमें 250 से अधिक विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, प्रचार्यों, मुख्याध्यापकों व अन्य शिक्षाविदों ने अपने सुझाव दिए, जिनको नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने में समायोजित किया जाएगा।

        श्री कंवर पाल ने कहा कि राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद भी शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के प्रति  गंभीर हैं और संभवत: हरियाणा की डिजिटल कॉन्कलेव की पहल को देखते हुए ही उन्होंने आज सभी प्रदेशों के राज्यपाल, जो अपने-अपने प्रदेश के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी हैं, का इसी तरह का कॉन्कलेव नई दिल्ली में बुलाया है और इस कॉन्कलेव के उदघाटन अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिया गया उदबोधन हमारे लिए प्रेरणादायक होगा।

        उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 21वीं सदी के नए भारत की नींव तैयार करने वाली है। यह नीति 34 वर्षों के बाद घोषित हुई है। इस नीति की विशेषता स्कूली शिक्षा में भी आमूल-चूल परिवर्तन लाना है, जिसमें तीन बिन्दुओं पर फोकस किया गया है जैसेकि किसी कारणवश शिक्षा बीच में छूट जाती है तो उसमें निरंतरता बनाना, प्री-स्कूल अवधारणा से शिशु शिक्षा पर जोर तथा शिक्षा के स्तर को वैश्विक स्तर पर ले जाना।  

        उन्होंने कहा कि प्रदेश में शिक्षा का इन्फ्रास्ट्रक्चर पहले से सुदृढ़ है। हरियाणा देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां 15 किलोमीटर की परिधि में कोई न कोई महाविद्यालय खोला गया है।

        शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश में गत 5 वर्षों में 97 नए कॉलेज खोले गए, जबकि हरियाणा गठन के बाद 48 वर्षों में केवल 75 कॉलेज ही खोले गए थे। उन्होंने कहा कि लोग वर्षों से चली आ रही शिक्षा व्यवस्था में जो बदलाव चाहते थे, वह इस नीति में देखने को मिला है और इसके तहत, अब प्रत्येक विद्यार्थी, चाहे वह नर्सरी में हो या कॉलेज में हो, वैज्ञानिक तरीके से पढकऱ राष्ट्र निर्माण में रचनात्मक भूमिका निभा सकेगा। इस नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में देश में पहली बार ऐसा हुआ है जब सकल घरेलू उत्पाद का 6 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा क्षेत्र के लिए निर्धारित किया गया है। इससे इस नीति के क्रियान्वयन में धन की कमी आड़े नहीं आएगी।
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